05% GST, FMCG राहत और NOTA—प्रकृति-प्रेम एवं ब्रह्मचर्य शक्ति के साथ शून्यएक से भ्रष्टाचार-मुक्त, बेरोज़गारी-मुक्त और ऋण-मुक्त भारत की दिशा
* विषय : 05% GST, FMCG राहत और NOTA—प्रकृति-प्रेम एवं ब्रह्मचर्य शक्ति के साथ शून्यएक से भ्रष्टाचार-मुक्त, बेरोज़गारी-मुक्त और ऋण-मुक्त भारत की दिशा
* भारत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ :- आर्थिक सुधार, लोकतांत्रिक जागरण और आंतरिक संस्कार—तीनों शक्तियाँ एक साथ कार्य कर रही हैं…(०१*०३०%)°{०१०१०१०१०}°= 01 || 010 दो आंख के मध्य व्यास रेखा है...
* वर्तमान केन्द्र शासन प्रशासक द्वारा 05% GST के माध्यम से FMCG क्षेत्र को मिली राहत और चुनाव व्यवस्था में NOTA बटन का मजबूत प्रावधान है…
* ये दोनों केवल नीतिगत निर्णय नहीं, बल्कि प्रकृति-प्रेम और ब्रह्मचर्य-आधारित आंतरिक शासन की ओर बढ़ता हुआ एक बड़ा कदम हैं…
* इन दोनों शक्तियों के आंतरिक दर्शन को स्पष्ट सुशासन का मॉडल 02कर स्टेट और केन्द्र सरकार सहारा देता और सुरक्षा कवच प्रदान करता है:…
* —कैसे ये देश को भ्रष्टाचार-मुक्त, बेरोज़गारी-मुक्त और ऋण-मुक्त समाज की ओर ले जाता हैं…
• तथा कैसे “शरीर उद्योग निर्भर, निर्भय संस्कार प्रसाद वितरण को साकार कर 02कर” छूट भविष्य के भारत का आधार बनाता है…
* 01. 05% GST—जनता को सीधी आर्थिक स्वतंत्रता का उपहार :- 05% GST में FMCG (Fast Moving Consumer Goods) को रखना केवल कर-सुधार नहीं, बल्कि एक मानसिक-आर्थिक मुक्ति है…
* यह तीन स्तरों पर देश को शक्ति देता है:-
* (क) दैनिक जीवन में सुलभता :- जब भोजन, साबुन, तेल, कपड़ा, नेचुरल शोध जैसी वस्तुएँ सस्ती होती हैं, तब आर्थिक दबाव घटता है…
* गृहस्थ व्यक्ति का ध्यान केवल कमाई पर नहीं, बल्कि जीवन-गुणवत्ता पर केन्द्रित होने लगता है :-यही प्रकृति-प्रेम की शुरुआत बिन्दु है…
* (ख) उपभोग से उत्पादन की ओर प्रेरणा:-
* कम कर का अर्थ है—अधिक मांग:…
* अधिक मांग का अर्थ है—स्थानीय उद्योगों को पुनर्जागरण :…
* यह बेरोज़गार युवाओं को रोज़गार नहीं, बल्कि कार्य-अवसर प्रदान करता है :…
* (ग) अर्थव्यवस्था में स्वच्छ प्रवाह:- कम कर = कम भ्रष्टाचार कम कर = पारदर्शी बिल कम कर = स्वच्छ व्यापार यह वह मॉडल है…
* जहाँ भ्रष्टाचार का स्थान ही समाप्त होने लगता है…
* 02. NOTA—ब्रह्मचर्य शक्ति से निकला लोकतंत्र [Ñatioñal] आत्मबल :- NOTA कोई मात्र बटन नहीं—यह साधारण नागरिक से निकला असाधारण आत्म-संकल्प है…
* यह ब्रह्मचर्य के “अन्दर से बाहर नियंत्रण” सिद्धांत पर आधारित है…
* (क) NOTA जनता को राजा बनाता है:- जब नागरिक किसी भी प्रत्याशी को स्वीकार नहीं करता, तब वह मताधिकार को पवित्र रूप से प्रयोग करता है…
*यह वही ब्रह्मचर्य शक्ति है:- “इंद्रिय पर नियंत्रण = लोकतंत्र पर नियंत्रण…”
* (ख) राजनीतिक शुद्धि की शुरुआत :- NOTA का बढ़ता प्रयोग दलो को बताता है कि जनता अब भावनाओं से नहीं, सिद्धांतों से चलती है…
* (ग) यह व्यवस्था देश को अदृश्य रूप से भ्रष्टाचार-मुक्त करती है:- क्योंकि जिन क्षेत्रों में NOTA अधिक होता है, वहाँ भविष्य का चुनाव संस्कार आधारित होना ही पड़ता है…
* 03. दोनो शक्तियो का संयुक्त प्रभाव — “आंतरिक शासन” की स्थापना :- जब अर्थव्यवस्था (05% GST) और राजनीति (NOTA) दोनों शक्तियाँ प्रकृति-प्रेम और ब्रह्मचर्य पर आधारित हो जाती हैं…
* तब समाज में तीन बड़े परिवर्तन होते हैं:…
* (1) भ्रष्टाचार-मुक्त शासन:-
* कम कर → कम रिश्वत …
* NOTA → स्वच्छ प्रत्याशी…
* जनता → निर्भय…
* (2) बेरोज़गारी-मुक्त समाज :- दैनिक उद्योग (FMCG) सक्रिय ; छोटे-मध्यम व्यवसाय बढ़ते
सेवा आधारित नए व्यवसाय शरीर उद्योग जन्म लेता हैं…
* (3) ऋण-मुक्त राष्ट्र का मार्ग :- जब व्यक्ति मूल्य आधारित उपभोक्ता बनता है और अधिक उत्पादन को प्रसाद वितरण शुन्य दो कर भुगतान करता है, तो परिवार, फिर समाज और अंत में राष्ट्र — ऋण से मुक्त बनता है…
* 04. “शरीर उद्योग निर्भर निर्भय संस्कार” — भारत की नई अर्थ-आध्यात्मिक रचना :-
मानव शरीर स्वयं शुन्य शून्य एक महान उद्योग है…
• श्वास—ऊर्जा विचार—दिशा कर्म—उत्पादन- कल्पना विस्तार विश्वास शक्ति नोटा वोट्स का उपयोग कर सकते हैं…
• यह वह 02-कर मॉडल है जो प्रकृति का मूल कर प्रेम ब्रह्मचर्य सिद्धांत है:…
•01 कर : श्वास-कर का हक़ आना जाना है…
•प्रत्येक श्वास के साथ ऊर्जा आती जाती लगातार प्रवाहित होती है…
• परंतु इसके उपयोग का नियंत्रण ब्रह्मचर्य है…
•02कर : कर्म-कर ज्ञान विज्ञान अध्यात्म है …
•जो काम हम शरीर उद्योग में सहयोग करते हैं…
•यही काम समाज के लिए प्रकृति सिद्धान्त पर मातापिता शरीर सम्भोग से बेटा बेटी के रूप मे और सरकार को कर के रूप मे भुगतान का आदान प्रदान होता हैं:…
•वही निर्भय संस्कार शादी मे भोजन प्रसाद वितरण मे ब्रह्म ज्ञान के बिना सम्भोग की निर्णय अनुमति देता है…
•यह मॉडल किसी व्यक्ति से पैसा नहीं लेता, बल्कि उन्हें संस्कार देता है, और संस्कार → व्यवस्था → समृद्धि वंश वृद्धि करने मे सफ़ल योगदान मे काम भावना जागृत इनसान प्रेम सिद्धान्त प्रोडक्ट्स अनुकूल होता हैं…
•निष्कर्ष : भारत का नया जागृत इनसान…
•05% GST की आर्थिक सादगी…
•ÑOTA की लोकतांत्रिक पवित्रता…
•ब्रह्मचर्य और प्रकृति-प्रेम का आंतरिक अनुशासन; मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करते हैं:…
•जहाँ भ्रष्टाचार अपराध नहीं, असंभव हो जाता है…
• जहाँ रोज़गार समस्या नहीं, स्वाभाविक जीवन का प्रवाह मधुर बनाता है…
• जहाँ ऋण मजबूरी नहीं, इतिहास बनता है…
•जहाँ शासन बाहरी नहीं, शरीर उद्योग संचालित नीति अंदर से संचालित है…
•यही वह भारत है— शरीर उद्योग निर्भर, निर्भय संस्कार सम्पन्न, और विश्व-कल्याण में अग्रणी…