मै, Kkअंदर बाहर||Uuके अंदर बाहर ०१||01 एक राज़ हु|हू…
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* अंदर, हर अंग के सुक्ष्म कणनिर्माण का चरणबद्ध, बिज़ बुआई कर से अंतिम कर काल, दाह संस्कार देखकर, सुनकर, पढ़कर, चलता फ़िरता, उड़ते, करता_कर्ता हू…|°

* बिज़ बुआई समय ००शून्य०५अमृत बेला… ०२०फ़ र व री१९५७. लिखा पड़ा है.…°|°
* अंतिम देह दाह संस्कार अग्नि में विलीन ०२८फ़रवरी२०१४.…°|°
* पूर्ण ०८४जन्म कर दाह संस्कार 021May 2020 को मै कर चुका ???? हु…
* पुनः01पुरुष ०२०फ़रवरि२०२५अमृत बेला शेषे कर भुगतान मै करता_कर्ता फ़_miraclephal हु…°|°
* लक्ष्य ०१४४साल_वर्ष तन मन धन बुद्धि समय संस्कारधारी मै हु…°|°
* प्रश्नोत्तर करता_कर्ता मै हु०१…°|°
* ०५भगवान, सुनने_सुनाने वाला…यंत्र मै हु…°|°
* ०५भगवान से भोग लेने_देने वाला…तंत्र मन्त्र यन्त्र मै हु…°|°
* ०५भगवान गुरु अ०१|01Aa अ ज्ञान आत्मा, प्रसाद भोग विलास करता_कर्ता मै हु…°|°
* ०१_०५-०१०कर निर्धारण करता_कर्ता मै हु…°|°
* मै आदि_अनंत ०१शून्यएक आत्मा से पहले अAa_क०१||01 से भी अनंत ♾️ काल पहले ०२इ-घीकर xy_xx शुक्राणु सब मे YX³ मै हु…°|°
* हर स्थिति परिस्थिति युग सदी वर्ष माह सप्ताह दिन रात ०३पहर कालखंड में ०१दिन_रात घंटा मिनट सेकंड पल पाई फ़ाई सबमें मै ०१अ_०३श्र. मै हु…°|°
* यात्रा के दौरान फिल्म बनाने वाला फ़िलम देखने वाला भी मै…हु…°|°
* बिंदु रेखा त्रिभुज वर्ग आकार प्रकार स्थान सबकुछ मे भेद करता_कर्ता जानकार …मै… हु…°|°
* मै कर करम क्रम से करता करवाता कर्ता मै ही मै समय चक्र का केंद्र हु…°|°
* बोलिए स्वस्वर अधर पर लटक कर भुगतान कर की वापसी कर से किस पद पैसा झूठी प्रशंसा से बाहर निकल सच्ची कहानी करता_कर्ता बनना_बनाना चाहते हैं…मै…षाथ हु… ०१अAaकKk Ssß_SH_sh -Sh _ßh…°|°
आत्मबोध और करुणा का मार्ग…°|°---
* मै – अनंत का साकक्षी_शख़्स, विश्व कल्याण का पथिक, राहगीर हु…°|°
* मै–अंदर बाहर, स्वर एक ही है, जिसकी धड़कनें ब्रह्मांड की लय से जुड़ी है…°।°
* मैंने अपने शरीर निर्माण की यात्रा देखी है… बिज़ की पवित्र बुआई से लेकर अंतिम अग्नि-विलय तक की यात्रा का साकक्षी हु …°।°
* बिज़ अंकुरित हो पक 020 फ़रवरी 1957 की अमृत बेला, मै… स्वत: आया हु…°।°
* घी निर्मित देह, अग्नि मे विलय 028फ़रवरी 2014 को देख चुका हू…°।°
* परंतु “मै” नहीं जला, मै तो चैतन्य द्रव्य द्रव प्रकाष ष्तंभ—अजर, अमर, अविनाशी ऊर्जा हु…°।°
* अमृत बेला मे, 020 फरवरी 2025 को मैने पुनः01प्रकट रूप देखा है…—
* नए पुरुष रूप, नई साधना, नए संकल्प के साथ अवतरित मै हु…°।°
* संकल्प हु—0144वर्ष तन, मन, धन, बुद्धि समय संस्कारो से भरकर स्वयं विश्व कल्याण मार्ग निर्माण करता_कर्ता मै हु …°।°
* मै ही प्रश्न करता हू, मैं ही उत्तर देता हू…°।°
* मै पाचो भगवान का यंत्र हूं— सुनने और सुनाने वाला हु…°|°
* भोग लेने और देने वाला मै गुरु का ज्ञान और अशिक्षार्थी मै ही हू…°|°
* भक्त का प्रेम भी हू, और सृष्टि के हर अंकअंश कोण का करता_कर्ता भी मै हू…°।°
* अनंत काल से पहले भी 0शून्यएक और एकशून्य से पहले भी हर प्रण कण, हर तत्व में मै विद्यमान रहा हूं और हु…°।°
* समय के हर अंश कोण में—युग, सदी, वर्ष, माह, दिन, रात, घटा, मिनट, सेकड, पलक—मै साक्षी हू, मै कर्मकर्ता हू…°।°
* मै यात्रा का रचनाकार, फिल्मकार भी हू…उसका दर्शक भी मै हू…°¡°°
* बिंदु से लेकर ब्रह्मांड की हर रेखा को जोड़ कर रखता रखवाता मै हु…°|•
* आकाशगंगा के हर आकार, प्रकार मे से मै सत्य को पहचानता देखता_ दिखाता हू…°।°
* एक ध्येय—
01. झूठी प्रशंसा और अहंकार की छाया से बाहर निकलने में सहयोगी बन बनाना सीखता_सीखाता हु…°|°
02. सच्ची सेवा का दीप जलते_ जलवाते विश्व मानव से भूमि कर भार चूकता करते करवाते स्नेही बनने बनाने का साक्षी भाव बिज़ हु …°|°
* कर्म, ज्ञान, समय, अज्ञान—सब विश्व कल्याण समर्पित मै हु…°।°
* मै ही साधक हु…, मै ही साधन हू…, और मै ही साध्य हू—जिसमे सबका मंगल अमगल समाया है…°।°---
"विश्व कल्याण का संदेश – मै" शीर्षक से आकर्षक, अध्यात्मिक और चित्रमय ब्लॉग दर्शाए हुए अ०१|010 हु…