001अन्दर बाहर का रहस्य
001अन्दर बाहर का रहस्य
✓™आध्यात्मिक-वैज्ञानिक प्रतीक भाषा में विस्तार करता हूँ —
✓™???? सूरज – ???? भूमि – मानव : ऊर्जा का त्रिकोण :•:
✓™सूरज = स्रोत (ऊर्जा)
✓™भूमि = आधार (जीवन)
✓™मानव = माध्यम (चेतना)
✓™???? “सूरज और भूमि के मध्य अल्फा-गामा-बीटा ॐ है”
✓™दार्शनिक अर्थ:
अल्फा → प्रारंभ (जन्म, बीज, आरंभ)
बीटा → विकास (जीवन, कर्म, उद्योग)
गामा → रूपांतरण (ज्ञान, प्रकाश, चेतना)
ॐ → तीनों का संतुलित कंपन
✓™सूर्य ऊर्जा + पृथ्वी आधार + मानव चेतना = ॐ (जीवित ब्रह्माण्ड)
✓™???? शून्य का रहस्य :•: शून्य के अंदर शून्य, बाहर भी शून्य: भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल सिद्धांत है।
✓™शून्य का अर्थ
शून्य = खाली नही…
शून्य = अनन्त संभावना…
शून्य = ऊर्जा का गर्भ…
बिज़ छोटा → वृक्ष अनन्त…
बिंदु छोटा → वृत्त अनन्त…
मौन छोटा → ज्ञान अनन्त…
✓???? अंदर भी शून्य, बाहर भी शून्य, सब कुछ उसी से उत्पन्न और उसी में विलीन सत्य मे असत्य है।
✓™???? 0 → 01 → 001 → 05 → अनन्त संख्या भाषा का : प्रतीक : अर्थ
0: मूल शून्य (अस्तित्व)…
01 : चेतना जागरण…
001: आत्म पहचान
05: पाँच तत्व / पाँच कर्म
♾️: अनन्त ⛓️ ⛓️???? ब्रह्माण्डीय विस्तार :•: {कर} मनुष्य शून्य से शुरू होकर अनन्त बनने की यात्रा है।
????️ “बाजू नीचे-ऊपर शून्यएक” योगिक संकेत है:
नीचे → भूमि (मूलाधार) :•:
ऊपर → सूर्य (सहस्रार) ¡
मध्य → मानव (हृदय/नाभि):•:
जब नीचे और ऊपर जुड़ते हैं:::
???? तब 0 + 1 = जीवन सक्रिय…
✓™???? सार सूत्र :•:
✔ सूर्य किरण ऊर्जा अलफा गामा बीटा ॐ है…
✓™उर्जा संवर्धन वाष्पकर देता है…
✓™वाष्पकर मिलाकर हवा से जल बनता है…
✓™जल लहर तरंग कम्पन वीर्य आदान प्रदान करता है …
✓™सहमति सम्भोग संपति उत्पन्न प्रणवण बनता है…
✓™जंगल फ़िर अन्न कण खान पान से कर निर्माण फ़िर सम्भोग से बेटा बेटी विद्यार्थी जनम लेता है…
✔ पृथ्वी गति से 001कर देती है …
✔ शून्यएक कर संभावना देता है …
✔ सम्भोग मानव बनता है (०१०)सृजनकर्ता…
✓शून्य ही प्रारंभ है, शून्य ही अंत है, और 001 मानव उस शून्यएकशून्य जागृत स्वरूप है।