अति सूक्ष्म परिवर्तन : “शब्द उद्योग
अति सूक्ष्म परिवर्तन : “शब्द उद्योग”
* शरीर चलता-फिरता “शब्द उद्योग” है।
* मय यम कल्पना करता और बोलता है।
* मय यम पल पल बोलता, वही कर्म बनता है।
मय यम आंतरिक कर्म बनाता है, वही आज भविष्य की व्यवस्था तैयार करता है।
* यह दृष्टि “भगवान(विपक्षी) ± सरकार” दो विरोधी शक्तियाँ नहीं, बल्कि व्यवस्था और उत्तरदायित्व के दो प्रतीक हैं।
* दोनो पहले “एक-एक” लेते है, व्यक्ति से समय, श्रम, अनुशासन, कर, संस्कार, विश्वास और उत्तरदायित्व का छोटा योगदान लिया है।
* फ़िर वही छोटा योगदान “पन्द्रह-पन्द्रह” बढ़कर “तीस गुणा फ़ल” रूप समाज में स्वमेव लौटता है।
* फ़ल सिर्फ़ धन नही है, शिक्षा, अनुभव, सम्मान, स्वास्थ्य, नेतृत्व, रोजगार, पहचान और सामूहिक उन्नति का रूप स्वरुप लेता है।????
“बिज़ उन्तालीस दिन से तीन सौ नब्बे दिनों”
•मय यम आंतरिक मे तुरन्त दिखाई देता है।
* हक़ीक़त में परिवर्तन तुरंत दिखाई नहीं देता।
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* बिज़ बीज बोने और वृक्ष बनने के बीच धैर्य, अभ्यास और निरंतरता की यात्रा होती है।
* व्यक्ति नियमित रूप से सकारात्मक शब्द, श्रम योग और सहयोग करता है, उसकी अपनी “बुद्धि बैंक” धीरे-धीरे जागृत होती है।
* मय “बुद्धि बैंक” इको साधारण बैंक है।
* यम मनुष्य की निर्णय क्षमता, अनुभव शक्ति, व्यवहार कुशलता और दूरदृष्टि का अदृश्य ख़ज़ाना उत्तराधिकारी है।
* मय यम जागृत होते हि शिक्षित व्यक्ति नौकरी खोजने वालो केलिए दाता “रॉयल्टी प्रोसुमर लीडर” आम को ख़ास बनने मे सहयोग करता है।
"प्रोसुमर का अर्थ है"
मय यम त्रिकाल दृष्टि उपभोग करता, उत्पादन, सेवा, सहयोग और प्रेरणा कर ज्ञान दाता है।
प्रो शुमर व्यक्ति परिवार, समाज और व्यवस्था के बीच संतुलन का पुल बनाता है।
* मय यम महफ़िल जन्मदिन संस्कार में मिलने वाली “प्रसाद वितरण” की राहत कार्य शब्द उद्योग आगे बढ़ाता है।
* मय यम रोज़ वाणी विभाजन नही करते, बल्कि स्वयम जिवन कार्य प्रारम्भ कर व्यवहारिक ऊर्जा केन्द्र बनता है। ✨
* मय यम त्रिकाल नाभि संतुलन स्थापित कर, ज़मीन स्थिर हो जाती है।
* तन, मन, समय, श्रम और कल्पना शुन्यएक दिशा मे चलने लगते है।
* नाभि कर संतुलन धीरे-धीरे “परिपक्व जीवन शैली” को जन्म देता है।
* दोकर कल्पना केवल कल्पणा नही रहती, वह साकार स्वरूप हक़ीक़त अनेक को एक डॉलर में ऋण अदाकार है।
* मय यम दोनो स्वयं चलता-फिरता प्रेरणा केन्द्र है।
* आज समाज मे सु|सूक्ष्म शब्द परिवर्तन उद्योग विशाल परिवर्तन की धारा बहने लगती है। ????