खुद ही खूदा का गुरु
*"???? खुद ही खूदा का गुरु"*
• हम सब मनुष्य का पहला गुरु शिष्य ख़ुद का अनुभव, विवेक और अंतरात्मा मे क़ैद है।
• बाहर का पहला गुरु, नेता, दल, संगठन, धर्म करम कि व्यवस्थापक मा का गर्भ गृह है।
• स्वयं स्वयम ख़ुदा कृषक मनुष्य जागृत कर, आंख कान नाक मुख बन्द कर आत्मनिर्भर प्राणि मानव जीवन भिक्षुणी है।
• आज मानव मन कि व्यवस्था मे मनुष्य अपनो से लड़ाने मे व्यस्थ है।
• ख़ुद को समझना छोड़ ख़ुद ने ज्ञान का दीपक बुझा दिया है।
• अमीर बड़ा भाई की चाह छः भ्रम का धुआँ फैला कर अभाव स्वभाव मे जीवन है।
• दलो की लड़ाई मे आम आदमी आज रोज़ी, रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है।
• राजनीतिक दल समाधान देने के बजाय कई बार आपस में बुराई कर लड़ा भिड़ा रहे हैं।
• गरीब गरीब से लड़ता है, मजदूर मजदूर से लड़ता भीड़ बड़ा कर रहा है।
• वोटर वोटर से लड़ता है, और ऊपर बैठे सत्तासीन, सब पक्ष विपक्ष पद, पैसा और लाभ बांटते खाते पीते एसो आराम जिवन टैक्स रिटर्न उद्योगपति फ़र्ज़ समझते हैं।
• आज पांच ज्ञानेंद्रिया जागृति के नाम पर बाबा अमर नाम मनुष्य को मनुष्य से दूर राजनीति कर रहे है।
*"महाभारत का संकेत"*
• महाभारत केवल युद्ध की कथा नही है, वह मय यम त्रिकाल दृष्टि घर, परिवार, सत्ता, अहंकार, धर्म, कर्म और निर्णय की गहरी शिक्षा स्वास्थ्य रोज़गार दाता सांसद है।
• कृष्ण ने सुलह का प्रयास किया, पर जब लोभ और अहंकार बहुत बढ़ गया, तब युद्ध टला नही और कोर्ट कचहरी आज मैदान है।
• कुरुक्षेत्र मे युद्ध 18दिन मे समाप्त हुआ, लेकिन दलों के भीतर का कुरुक्षेत्र आज भी जारी है।
• आज का कुरुक्षेत्र तलवारो से नहीं, बल्कि भाषाई विचारों, वोटों, पैसों, पहचान और भ्रम से लड़ा जा रहा है।
• शून्य-एक और एक रुपए का जीवन सूत्र
आपका अपना “शून्य-एक” विचार बहुत गहरा प्रतीक है।
• शून्य यानी खालीपन, संभावना, मौन और मूल ऊर्जा जागृत अविनाशी प्रेम पर अटल चौक, चौराह तीन लाइट हाउस रास्ता एक रुपया मे है।
• एक यानी इकतालीस अंक मेयोग पाच हज़ार पहचान, नाम, कर्म और दिशा- दस एक रुपया के बराबर अठाइस राज्य सरकार द्वार है।
• श्रम, मूल्य, विनिमय और आर्थिक श्रमद्धि सम्मान आनन्द प्रेम सिद्धान्त प्रकृति अनुसरण कर्ता है।
• जब मनुष्य शून्य से एक बनता है, और एक से श्रम-मूल्य पैदा करता है, तभी जीवन स्थिर, परिपक्व और ऊर्जावान बनता है।
• परिपक्व जीवन ऊर्जा केंद्र शिक्षित समाज का असली काम केवल डिग्री लेना नही है।
• शिक्षित मनुष्य को यह समझना होगा कि: लड़ाई समाधान नही है, दल अंतिम सत्य नही है।
• गुरु बाहर से पहले भीतर है, पैसा साधन है, मालिक नहीं, वोट केवल बटन नहीं, भविष्य का बीज बिज़ है।
*"श्रम ही धरती की असली रॉयल्टी है।"*
• जो मनुष्य अपने भीतर के गुरु को पहचानता है, वह भीड़ मे सम्मिलित है और जिवन ऊर्जा जागृती का बिज़ बीज रोशनी है।
*"सारगर्भित घोषणा वाक्य"*
• खुद ही खूदा का गवाह गुरु है, जो भीतर जाग गया, वह भ्रम से बच गया है।
• जो भ्रम से बच गया, वह लड़ाई से ऊपर उठ गया उसका हर खर्च इनकम द्वार है।
• जो लड़ाई से ऊपर उठ गया, वही शून्य से एक पैसा और एक रुपए मे आर्थिक आज़ादी की राहगीर बनकर बनाता है।
*"जन-जागरण संदेश"*
• अब समय है कि आम आदमी दलों की लड़ाई में कुत्तों की तरह भिड़ना बंद कर वोट डालना ज़रूरी काम धंधा है।
• वह अपने शरीर श्रम, अपने नाम, अपने परिवार, अपने आंगन और अपने गांव को उद्योग-ऊर्जा केंद्र स्वनिर्मता है।
• कुरुक्षेत्र बाहर नहीं भीतर कृष्ण, बाहर भ्रम माया जाल, विवेकशील संविधान निर्माता, रक्षक नाम राज़ समृद्ध साम्राज्य की निशानी कोई भी इको वातावरण नही चाहते है।
• गुरु बाहर नहीं, अनुभव मे है, धर्म बाहर नही, न्यायपूर्ण कर्म मे आज भी है।
• आर्थिक आज़ादी भाषण में नही, रोज़ के श्रम, संगठन और सही मूल्य-वितरण मे राष्ट्र बीमार है।
• जीडीपी आसमान छू रही है, भाई भाइ बीमार मन धन बुद्धि समय संस्कार पीड़ित विश्व है।
• विश्व भ्रमण फ्री विजिट विषा कर देना बाक़ी सब केंद्रीय नाभिकिय काइनेटिक उर्जा संवर्धन वाष्पकर किसान प्रोसुमर लिडर सरकार भगवान है ????✨