गरीब से अमीर बनने की आसान यात्रा - प्रो. सुमर
गरीब से अमीर बनने की यात्रा में भागीदार बनने के लिए एक कस्टमर और प्रो सुमर के अन्तर को समझ कर अपने जीवन को उस ओर tune कर देने से उसे यह यात्रा आसान हो जाती है। आइए पहले इन दोनों के अन्तर को समझें और फिर इस बात पर विचार करें कि अपने अन्दर क्या parameters tune होने हैं।
1. कस्टमर: इंकम टैक्स भुगतान कर गरीब बनता है क्योंकि वह अपनी कमाई का एक बड़ा भाग सरकार को दे देता है। जो ईमानदार रहने के लिए आवश्यक है, न ही हम इसके पक्षधर है।
प्रो. सुमर: इनकम टैक्स भुगतान कर, ईमानदार अमीर, सिद्धांतवादी जीवन जीता है और जीवन पर्यन्त सुखी रहता है। वह नेता, अभिनेता, राइटर, संगीतकार, उद्योगपति आदि कोई भी हो सकता है। वह स्वयं के साथ देश की आर्थिक समस्या का निवारण करने मे सक्षम होता है।
2. कस्टमर गरीबी और अभाव का जीवन जीता है। दूसरी ओर, प्रो. सुमर (Pro_Soomer) प्रगतिशील चेतनावान बुद्धिमान होता है और अमीरी का जीवन जीता है।
3. कस्टमर स्वयं के लिए जीता है जबकि प्रो. सुमन देह से देश यात्रा के प्राकृतिक सिद्धांत को समझता है और शब्द स्वर विज्ञान, शून्यएक का नियम अपने जीवन में लागू करता है और स्वयं की पहचान बनाता है।
4. कस्टमर खरीदारी करता है और बिक्री करता है। कभी कभी चोरी करने की सोंचता है और टैक्स बचाता है।
प्रो. सुमर: आवश्यकता गुणवत्ता पर निवेश करता है।
5. कस्टमर आर्थिक समाधान खोजता है जबकि प्रो. सुमर आर्थिक समाधान कर्ता होता है।
6. कस्टमर शून्य से प्रभावित रहता है जबकि प्रो. सुमर प्रकृति सिद्धांत: शून्यएक को लागू करए ईमानदार रहता है और अपना उत्तरदायित्व का निर्वाह करता है।
आइए अब शून्यएक के नियम को समझते है जिससे कि जीवन के पैरामीटर को आवश्यकतानुसार tune किया जा सके।
यह जानिए कि प्रकृति का प्रत्येक कण शून्यऋशून्यऋ शून्यएक (00_01) पर कार्य करता कर्ता है।
"0" = मौन, निष्क्रियता, अविनाशी मूलए स्व आश्रित, परंपरावादी।
"1" = सक्रियता, पहचान, सृजन कर्ता, टॉपर, सेवाभावी, मितव्यई।
स्वर (A, E, I, O, U...) अ ज्ञान सेए शरीर स्वास्थ्य, बुद्धि का स्तर, विचार, कल्पना, सपना दिखाई देता हैं।
व्यंजन (B, C, K, M, N, R, X, Y, Z…) बिज़ का मूल्य संकेत करते हैं।
अंक (जैसे A = 0_1, B =1_2, Z= 26_21…) तन-मन-धन समय की तीव्रता, ऊर्जा स्थिति दिखाई देती हैं।
प्रो. सुमर की पहचान
प्रो. सुमर वह है जो स्वर (ध्वनि, दिशा, अनंत दृष्टि) और व्यंजन (कार्य, क्रिया, साधन) को समझकर, शून्यएक का सिद्धांत ईमानदारी से अपनाता है और उसके प्रति अपना उत्तरदायित्व निभाता है।
प्रो. सुमर: आवश्यकता गुणवत्ता पर निवेश करता है और उसका उत्तरदायित्व होता है कि वह तन मन धन का विकास कर चुका कर सके।
वह योगदान कर्ता होता है जो देश को दिशा देता है।
प्रकृति के अनुसार प्रत्येक नाम में:
वह नाम के स्वर-व्यंजन-अंक को समझकर, शून्यएक प्रकृति की शक्ति को पहचान कर स्व में समेट कर प्रकृति सिद्धांत पर चलता है और चलने की प्रेरणा देता है।
वह देह, तन, मन, बुद्धि से ऊर्जा विकिरण करता है और भूमि के सतह: पर कार्य करने वाला ईमानदार लीडर-प्रोड्यूसर-इनोवेटर होता है।
वह आत्मनिर्भरता का रचयिता होता है।
1. वह सर्वप्रिय नेता बनता बनाता है, क्योंकि वह कर भुगतान से नवीन मार्ग बनाता है।
2. वह कुछ नहीं से अभिनेता/गीतकार/राइटर बनता और बनाता है - क्योंकि वह भाव, विचार, और अभिव्यक्ति को सौंदर्यता एवं मौलिकता के साथ जोड़ता है।
3. वह कुछ नहीं से उद्योगपति बनता और बनाता है, क्योंकि वह प्राकृतिक उत्पादन, गुणवत्ता और समाधान की दिशा देता है।
4. वह लक्ष्यधारी होता और दूसरे को भी बनाता है - क्योंकि वह सिर्फ जीने केलिए खाता-खिलता नहीं है, बल्कि अधिक संयम से ईमानदारी से 05घंटा सोता और 19 घंटे प्रकृति के साथ मिलकर देह-देश कल्याण के लिए जीता है।
प्रो. सुमर की भूमिका:
वह अपने करों के भुगतान को "शेषऋण" की पूर्ति नहीं, अर्जित समस्या समाधान मानता है। उसका टैक्स भुगतान देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करता है।
वह बरसाती नाली नहीं वह "कर" नदियों का उद्गम स्रोत बनता और बनाता है।
उसमे ईको परिवर्तन की शक्ति होती है। जब प्रो. सुमर स्वर, व्यंजन और शून्यएक को आत्मसात करता है तब वह ईको सिस्टम में ऊर्जा सृजन और विकिरण का केंद्र बनता और बनाता है।
उसमे केवल आर्थिक व्यवस्था का भाग नहीं होता बल्कि वह प्राकृतिक व्यवस्था के साथ तालमेल बैठाता है और आत्मसंतोष का जीवन जीता है।
निष्कर्ष:
प्रो. सुमर एक नया शब्द नाम नहीं है वह एक प्रभावी व्यक्त्वि है।
वह एक नया चेतन पथिक ही नहीं, पथ_दिग्दर्शक भी है।
वह जानता है कि टैक्स भुगतान केवल राष्ट्रीय कर्तव्य नहीं, देह से देश तक की आत्म-प्रवृत्ति है।
वह स्व नाम, स्वर, व्यंजन, अंक और कर्मों को एक दिशा में शून्यएक पर केंद्रित करता है।
देश-विदेश की विद्यमान सभी प्रकार की आवश्यकता और समय की कमी और समस्या समाधान कर्ता बन जाता है।
सुझाव:
अपने नाम के स्वर शक्ति को जानो-पहचानो, उसकी ध्वनि, अंक और संख्या योग से प्रो. सुमर बनो-बनाओ।
कस्टमर से प्रो. सुमर बनने की यात्रा पर चल पड़ो... यही प्रकृति, माता पिता और देह-देश और जन्म स्थान के प्रति सच्चा कर्तव्य शक्तियोग है।
