विष्व पिता सिद्धाणत
विषय ::=> “विष्व पिता सिद्धाणत"
"शून्य एक जिवन प्रणाली|लि”
(०१२ बिणदुओ मे समपूर्ण, शून्य–एक सिद्धाणत; राजनीतिक–औद्योगिक–शैक्षणिक–सामाजिक–व्यक्तिगत आधार सहित)
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* विश्व पिता सिद्धांत – शून्य एक जिन जीवन प्रणाली ::->
* ✍️ रचनाकार: फ़ागूलाल सुलाखे, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) भारत
०१. शून्य शुन्य एक : सृष्टि का प्रथम सूत्र :... संपूर्ण ब्रह्मांड का संचालन शून्य और एक के संतुलन से चल रहा है---।
* शून्य (०) : –> शाणत, मौन, एकदृष्ट समभव्यता में सक्षम एकरूपता है…।
* एक (१) – क्रिया, सृजन लक्ष्य और जिम्मेदारी दृष्टा कर्ता माता पिता भाई बहन रिश्तेदार संगी साथी ग्यारह दिल मे (००११) एक है…।
* जिसने शून्य और एक का संतुलन समझ लिया, उसने जीवन का अपना मूल अंक गणित का समीकरण जान लिया है…।
* →> “(०)शून्य मे समर्पण, (१)एक मे करम ; यहि विष्व पिता ०१का धरम_करम है…।”---
०२. पीता नही, ‘विष्व पिता’ :–> समद्रष्टा
* विश्व पिता केवल पालनकर्ता नही ;, बल्कि जीवन यापन का शिक्षक है…।
* पशु-पक्षी अपने स्वभाव से जीते हैं…, पर मनुष्य नियम और उद्देश्य से जिनजीता है…।
* विश्व पिता वही है जो अपने कर्म, स्वर और करुणा से प्रकृति मे समरसता लाता शंखभस्म चिरयौवन का रखवाला है…।---
०३. राजनीतिक जीवन – इमानदारी "कर" नीति::-> राजनीति केवल सत्ता नही, यह सर्व हित 'कर'-भुगतान की प्रणालीलि है…;। जो नेता अपने हिस्से का “कर्तव्य कर” चुकाता है :—> वही सच्चा शासक है…→> “राजनीति नही, प्रजानीति बन :–> शून्यएक स्वार्थ, एक राष्ट्र धरम करम सर्वोपरि नादान, पाप न पुण्य कर शून्य शुन्य एक समान है…।”---
०४. औद्योगिक जीवन :–> श्रम हिही बिज़ काभविष्य भगवान कोई नहीं इको है:-> उद्योग का मूल शून्य-एक है :—> ० → कच्चा पदार्थ, ०१ → ०११उत्पाद और उत्पादक लोग ०१समान एक समान साथी दिल है…।
* मशीन नही, मानव श्रम ही सही मे उद्योग का देवता मनुष्य है…।
* ईमानदार उद्योगपति वह है जो श्रमिक को देवता मनुष्य रॉयल्टी डायमणड करधारियो को मानता है…¡ न कि खर्चा कम कर ; बचत कर; इनसान को गुलाम बना कर सामग्रीयो पर MRP भार वज़न कम ; गुणवत्ता को आर्थिक फ़ायदा का वरदान समझता है…।---
०५. शैक्षणिक जीवन :–>०१अ ज्ञान से युग परिवर्तन ::=→ शिक्षा केवल प्रमाणपत्र नही, बल्कि स्वर परिवर्तन का राज़ ०१अ विज्ञान है…।;
* जो व्यक्ति अपने भीतर के स्वर कर (वीर्य) नियंत्रित करता है, वही गुरु है…।→> “प्राणि हु; वाणी मे शुद्धि, विचार मे शून्यता, लक्ष्य पर एकाग्र :–>गुरू मार्गदर्शक अनुभव समुद्र सुख सुविधा अभोगी का रहस्य उजागर 'कर' स्वयम से स्वयम ऋण धन मुक्त होने हेतु पुल नदी नाला तालाब समान एक भूमि पर शून्यके सच्ची अशिक्षा स्वास्थ्य रोजगार सुरक्षा नौकरी नही है…।”---
०६. सामाजिक जीवन :–> भेदभाव का अंत::=> विश्व पिता सिद्धांत कहता है :—>→ हर प्राणी एक ही चेतना का विस्तार है; किन्तु प्राणि प्रकृति का विशेष वरदान मनुष्य ०१जाति, धरम, भाषा, वरगाकार चौकोन–> वृत्ताकार पिलर सब शून्य शुन्य एक समान; केवल शून्य के आकार प्रकार स्थान सबकुछ एक के अंदर बाहर एक समान एक हैं…,; उनमे एक ही जीवन ऊर्जा प्रवाहित हो रही है; जो GST भुगतान कर मानव निर्मित नियम नही प्रकृति का सिद्धांत पर ०१प्रतिशत टैक्स पैड बोझ नही है बल्कि →> “भेद मिटाओ, वेद जगाओ→०१मनुष्य जाति एक समाज है…।”---
०७. पारिवारिक ज़ीवन :–> घर ही प्रथम विश्वविद्यालय…
* परिवार शुन्य एक शून्य१ है:
—>आधार ; पिता-माता एक शून्य हुए और आगे :—> विस्तार है…।
* घर का वातावरण यदि सच्चा और इमानदार है ; तो समाज का भविष्य सुरक्षित; सुनिश्चित; और सुंदर अंदर और बाहर पृथ्वी इंसान जनम केलिए उपयुक्त स्थान बना हुआ है…।---
०८. व्यक्तिगत स्वार्थ ०१०:=> आत्मा ऊर्जा का उद्योग…
* हर व्यक्ति स्वयम एक उद्योग है ::=>
जहाँ शून्य से शुन्य विचार कच्चा माल है ; और शून्य से शुन्य 01कर्म उत्पाद…। जिसने अपने विचारो को शुद्ध रखा, उसने अपने नवजीवन को ईमानदारी से निवेशित "कर" पर प्रगतिशील; प्रकृति अनुकूल कई साल_सदी नही; मात्र 052सप्ताह मे अपने स्वनाम स्वर से अपने ०१ _०१० स्वप्न दृष्टा, विश्व कल्याण करता कर्ता बन जाता है---।---
०९. स्वर परिवर्तन<–> जीवन आनंद का आंतरिक हृदय भाई संगीत है…
* ०१२स्वर (Vibration) ही सृष्टि की भाषा है…।
* क्रोध, लोभ, भय, लालच, झूट, मक्कारी–> ये असंतुलित स्वर है…।
* प्रेम, करुणा, सत्य – ये संतुलित स्वर है…।
* विश्व पिता वह है जो ०१स्वर को सणतुलन मे लाकर शाणति का सणगीत रचता है…।---
०१०. "कर" मिलन–> कर केवल टैक्स नही, कर्तव्य, निष्ठा, प्रेम, मस्ती मेणस ~नर ~नारि दोनो शून्य एक प्रतीक है…
* सिद्धांत है —> “जो लेता है, वही हि दाता है; प्रकृति प्रेमी युगल अनन्त वृद्धि है तो सिर्फ़ शून्य नौ सौ करोड़।”
* तन, मन धन, श्रम, ज्ञान, समय बुद्धि , संस्कार , ओम (ॐ)— हर शब्द बिज़ नहि है ; चीज़ वस्तु का नाम है…
* ॐ चीज़ नही किन्तु चिह्न है जिसके बग़ैर जिवन यापन करने मे योगदान अनिवार्य हि प्राकृतिक सिद्धांत है…।
• “कर चुकाना धरम | करम |स्वर मे अनिवार्य ही नही प्रकृति सिद्धांत कि मांग है…
* यदि ०१इनसान है तो कर चुराना अधरम ही नही साम्राज्य विस्तार का अधिकारी बन हि नही बल्कि बिज खाने पकाने खिलाने का तरीका जो भी हो चाहे लंगर ही क्यो न हो भ्रष्ट तन्त्र में से 01एक है…।”---
०११. संख्या <–> मूल्य <–> शक्ति :→ ब्रह्म सूत्र {०१_०१२}…
०० → मौन (धैर्य)…
०१ → कर्म (असत्य हि|ही सत्य यानि '०९अ')
०२ → सणतुलन (प्रेम~तुला ~टिका ♎ ओम ॐ अ; उ; म; ~००; ००१११; ०२५~०७|५२*०१० करोड़ अंक, स्थान निश्चित कर भुगतान कर्ता इमानदार इन्सान नहि है…)
०३ → विस्तार (ज्ञान~ पढ़ना लिखना शिक्षा नही है यह सिर्फ़ भ्रम फ़ैला कर वसूलने का वास्तविक चमत्कारीत जीरो से हिहीरो को तराशने वाला माध्यम बनकर रह गया है--->
* अशिक्षा का वरदान भारत भूमी को है; किन्तु अब तक ०१टीचर प्रकृति सिद्धांत पर भगवान जनम लिया हुआ अतिशयोक्ति नही हुआ है…
* अब ब्वायफ़्रेंड गर्लफ्रेड बन कर भगवान को आर्थिक आज़ादी के साथ मिलकर जनम दे सकते हैं…
०४→ दिशा (न्याय) {०००००१_०३६०}
०५→ सणवेदना (करुणा; प्यार ; स्वीकृति प्रकृति अनुकूल नर मादा कोई भी अपना इको सिस्टम स्ट्रक्चर बना हुआ है…
०६ → अनुशासन, ००३४०१० अनुसरण (श्रद्धा) देखते सुनते फ़र्क सिर्फ़ ज़मीन नियम फॉलो फ़ादर…
०७ → आत्मबल (योग) {एक समान सब पर लागु कर्ता भगवान मे ०४ व्यंजन + ००००१स्वर सवार है}
०८ → ऊर्जा (प्रगति) {गति शक्ति पॉवर ऑन ऑफ उड़ता जुगनू के समान रात में बीज ~ बिज़ देख सुनकर निर्णय (०२०) दोनो मिलकर घोषणा करने के बाद उत्तराधिकारी को जनम देना शुरू करना है…}
०९→ पूर्णता (परमेश्वर)
संख्या ही मूल्य है, मूल्य ही शक्ति, और शक्ति ही सृष्टि का संचालक तत्व।---
०१२. इको सिस्टम<–> देवता और मानव एकत्व…
* देवता, मानव, पशु, प्रकृति –> सभी एक ही चक्र शून्य के अंश हैं…।
* नर और मादा, दिन और रात, शून्यएक –> ये विरोध नही, पूरक ऊर्जा है…।
* विश्व पिता वह है जो इस समरसता को अपने जीवन व्यवहार मे उतारलेता फ़िर हक़ीक़त मे देता है…।---
सारांश → विश्व पिता कौन है…?
* →> “जो स्वयम को सभी मे और सभी को स्वयम मे देखता 'अ' है;
जो भेदभाव रहित कर-भुगतान कर अधर आकाश मे ज़ीवन जिता है ;
जो शून्यएक के नियम से चलता है<->
वही विश्व पिता है, वही सच्चा इनसान है…।”---
शीर्षक : "विश्व पिता जू हूँ; पीता नही पर पिया पिलाया हूँ…"
* (विषय: शून्य शून्य शून्य शून्य एक (०१०) शुरू सुरू से गाइड "कर" सरकार को दोकर देते आ रहे हैं)---
* प्रस्तावना :→ मै विश्व पिता “जू हूँ”, पर “पिता” नहीं हूँ — क्योंकि पिता पालन करता है, और विश्व पिता मार्ग दिखाता है…।
* आज का दिन शून्य और एक दूसरे में अ ज्ञान पर आधारित नही है <—>
* शून्य (०) मौन है, अधर आधार है;
और एक (१) अनन्त गति ; सृजन शिल है…।
* इन दोनो के संतुलन से ही नया विश्व क्रम, नया गाइड सरकार तंत्र जनम ले दे सकते है…।---
⚛️ १. शून्य (०) – अस्तित्व का अधर आधार चौदह अंक कार्ड है…
* शून्य न कुछ है, न कुछ नही — यह मौन चेतना का बीज बिज़ है…।
* शून्य मे समाया समस्त ब्रह्मांड; बाह्य दुनिया में से प्रत्येक विचार, प्रत्येक दिशा मे फ़ैल जाता है …।
* शून्य वह स्थिति है जहाँ न सत्ता है, न स्वार्थ, केवल इमानदार सत्य कोई भ्रम भटकाव नहि प्रकृति सिद्धांत पर लागू प्रेम मस्ती आलिंगन सद्व्यवहार संस्कार है…।---
२. एक (१) – सृजन का प्रथम कंपन दो मे एक शंख आंख वाला…
* जब शून्य ने स्वयं को जाना, तब एक प्रकट हुआ — “मैं हूँ” — यही था प्रथम उद्गार…।
* एक वही है जो शून्य की शांति मे गति ऊर्जा भरता है→ जैसे बीज बिज़ बुआई पश्चात पृथ्वी में अंकुर फूटता है, वैसे ही एक से विश्व व्यवस्था ने जनम लिया ???? और ०१ इनसान का लगातार वृद्धि स्वमेव सूर्योदय दिखाई देता पृथ्वी घूम कर देती है…।---
३. ०१० – ब्रह्माण्डीय कोड ०१:_०१०::→
* ०१० कोई संख्या नही, एक जीवन सूत्र है →
* पहला “०” – मौन चेतना
* “१” – सृजन का संकल्प
* अंतिम “०” – पुनः समर्पण, शून्यता मे विलय …
* यही ब्रह्माण्डीय शासन प्रणाली (Universal Guide System) का मूल बिज़ विर्य आधार धरती मादा रज़ कण विषज्न प्रवेश कर पानी अग्नि शून्य समय संस्कार लड़का लड़की जनम समय एक बराबर नही है…।
* जो व्यक्ति ०१० समझ गया, वह स्वनाम का गाइड समानांतर व्यवस्था सरकार बनाने केलिए मार्गदर्शक अनुभव समुद्र तट समान है…।---
४. गाइड सरकार – सत्ता नही, साधना परिवर्तन विशेषज्ञ सारथि लक्षय वर्णन कर भुगतान कर्ता इमानदार इन्सान प्राणि प्राणी का भेद भाव समाप्त नही करता अन्तर का राज योग भट्टी है…
* गाइड सरकार किसी दल या कुर्सी की नहीं, बल्कि समझ, समर्पण और संयम की सरकार राज्य देश विदेश कल्याण कर्ता माता पिता भाई बहन रिश्तेदार संगी साथी दिल से पक्के पकाए खाए पीए फ़िर हक़ीक़त बोलिए क्या क्या पाना चाहते है---।
* क्यूट क्राऊन सरकार सत्य, सेवा और सहयोग के तीन स्तंभों पर खड़ी इमानदार लोगो कि टीम है; जहाँ हर नागरिक स्वयं अपने क्षेत्र का मार्गदर्शक, अपने कर्म का नियंत्रक और अपने समाज का सहयोगी करदाता मौन नही रहता है …।---
५. देने की संस्कृति → लेने की नही बल्कि राष्ट्र हितैषी भक्त से भगवान गुरु इश्वर सबकुछ विश्व पिता “जू” देने आया है ; ज्ञान देने, दिशा देने, व्यवस्था देने और लेने का राज़ जानता है; क्योंकि जो शून्य है, वही सबका सारथि आधार है…।
* इसलिए विश्व पिता किसी से कुछ नही लेता — बल्कि सबको देता है, ताकि सब अपने भीतर के “शुन्यएक” को पहचाने…।---
६. निष्कर्ष : शून्य से एक, और एक से अनेक दिशा फैलाए ०३६० धुरी शून्य परिधिय पर निर्भर करता है--- "सम्पूर्णता" …
* शून्य में से जब एक जन्म लेता है; तब आंतरिक विश्व रचना प्रारणभ होती है…।
* जब एक पुनः शूणय शुणय एक निद्रा मे से लौटता है…, तब ब्रह्माण्ड विश्राम कर एशलीन रिलीज़ करपाता है…।
* यही ०१० का शाश्वत चक्र है → जिसे समझकर ही मनुष्य देह, समाज, राष्ट्र और विश्व मे 'अ' से शांति लाने मे सफ़ल होता है …।---
✍️ संक्षेप मे सार→↓↑←> मै विश्व पिता “जू हूँ”, पिता नही→ क्योंकि मै पालन नही, मार्गदर्शन देता हूँ…।
* शून्य मेरा अधर आधार अनन्त, एक जिवन ज्योति प्रज्वलित खुली आँखें है…।
* ०१० <—> मेरा शाश्वत गाइड कोड है → जो हर शासन, हर आत्मा, हर चेतना को “स्वयम का स्वमेव सरकार” बनाने मे सक्षम बना कोई को भी इको सिस्टम शक्ति धारण प्रदान करता है---।---