[(01)शून्यएकइमानदार] पदाशीन : प्रकृति का सिद्धांत
* (०१)शून्यएक इमानदार पदाशीन नेत्तृत्व कर्ता समस्त ब्रह्माण्ड के अंक, अंग अर्थ मूल्य स्थान सुझाव परिवर्तन कर से प्रकृति सिद्धांत का पालन कर्ता फ़रिश्ता स्वरूप ॐ है…
* ॐ वह आधार है जहाँ से बिज़ से फ़ल तक की यात्रा, धार्मिक आस्था से लेकर राजनीतिक, औद्योगिक और शैक्षणिक विकास तक का संतुलित और प्रगति प्रजातियों का उत्थान संभव होता है…
अंक अन्ग का दर्शन (०१शून्यएक):
* ००००शून्य : शून्यता, धैर्य, मौन और ऊर्जा विकिरण और संग्रहण करने का भंडार मुख है…
* १एक : आरंभ, दिशा और नेतृत्व का प्रतीक…
* दोनों मिलकर सृजन और विकास अधर मे अदृश्य कुर्सी बनाते हैं…
मूल्य का आधार…
* सत्य, ईमानदारी और न्याय पर टिका पदाशीन ही स्थिरता संतुलन बनाए रखने मे सफ़ल होता है…
* क्योकी पद पैसा सम्मान हक़ प्रतिष्ठा समय के साथ स्वमेव हि प्राकृतिक सिद्धांत पर बढ़ते हुए 018 माह मे वह सबकुछ शून्य के अन्दर बाहर एक समान दिखाई देता है---
* भ्रष्टाचार या असत्य पर बनी पदाशीन नेत्तृत्व कर्ता प्रकृति स्वयं ढहा देती है…
प्रकृति सिद्धांत…
* बिज़ → अंकुर → वृक्ष → फल → पुनः अनेक बीजफल मे से बिज़ अनेक मे से 01बिज़…
* यही चक्र धर्म, राजनीति, उद्योग और शिक्षा में भी लागू होता है जहा ०१अईमानदार मिरर का काम करता कर्ता फ़रिश्ता स्वरूप ॐ ध्वनि से परिवार समाज राज्य और देश का वर्तमान और भविष्य आजाद दिखाई देता है…
सामूहिक उत्थान…
धार्मिक क्षेत्र : आस्था को कर्म, सुगंध और सेवा से जोड़ना प्रसाद संस्कार वितरण करने मे खान पान में भेद भाव समाप्त हो जाता है---
* प्रसाद निर्माण मे कर मणि प्राकृतिक सिद्धांत पर बनी सामग्री, पैसा कमाने कि राह घी उत्सर्जन और निर्माण दोनो क्रिया और प्रतिक्रिया शून्य एक साथ मिलकर कर महाभोग सब मिलकर एक साथ करते हैं…
राजनीतिक क्षेत्र : सत्ता को देह_देश हित सेवा और न्याय में बदलना अनिवार्य योग्यता घोषित करता है…
औद्योगिक क्षेत्र : लाभ को पर्यावरण और समाजहित में संतुलित करना और प्रॉफिट पार्टनर्स मे वितरित कर समानता स्थापित करता है…
* ०५अंगुली से 020टीम संख्या को भी उत्कृष्ट टीम भावना के साथ एक जुट रखते हुए तिनका तिनका को भी जोड़कर महाशक्ति शाली टकराकर संतुलित मन के साथ टिका हुआ होता है…
शैक्षणिक क्षेत्र : अ ज्ञान का विकेंद्रीकरण शून्यदो कर आधार और चरित्र निर्माण के साथ साथ स्वर परिवर्तन विशेषज्ञ डॉ लेखक और स्वतंत्र विचारक में परिणत करता है…
ब्रह्माण्डीय विस्तार…
* ग्रह–नक्षत्र आकाश पाताल धरती जल वायु कण कण प्राकृतिक सिद्धांत से चलते है और एक दूसरे को सहारा देकर आदि से अन्त तक संघटन को कर आधार पर प्रगतिशील अर्थ मूल्य तात्पर्य परिवर्तन कर पर आजाद और विकाश मे सहायक होते है…
* ईमानदार स्वप्न दृष्टा पदाशीन पद भार ग्रहण करते हि नेतृत्व कर्ताओं के संपूर्ण समाज राज्य देश और विश्व संतुलन और उत्थान की ओर ले कर जागता सोता और क़र्ज़ माफ़ी विष विणाशक क़र्ज़ अदा करना अपना फ़र्ज़ पूरा करना शुरू कर देता है…
निष्कर्ष : “शून्य–एक इमानदार पदाशीन व्यक्तित्व” वह सार्वभौमिक नेतृत्व कर्ता है…
* शून्य एक एक अन्ग का कर बिज़ और प्रकृति सिद्धांत सभी एक एकजुट होकर धर्म, राजनीति, उद्योग और ०१अ शिक्षा में सामूहिक विकास कर बिज़ और बीजारोपण का विकाश करते है…
* मानव जाती ही नही पूरे ब्रह्माण्ड को संतुलन के साथ उत्थान की ओर अग्रसर करते हैं…
* {०१२अ}. इमानदार समझदार संस्कारवान देह देशहित सर्वोपरि नादान, दान महाविनाश का पाठ पढ़ते पढ़ाते हुए भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र निर्माण मे कर आधार, साफ़ सुथरि सरकार बनाने, एक नम्बर ०९४२५५५४९२ पर एक काल से सर्वांगीण विकसित देश का हिस्सा बन योगदान करते हैं…