कलयुग का भगवान करेंसी है
कलयुग का भगवान करेंसी है
* मुंह बंद, कदम-दर-कदम लक्ष्य की ओर शुन्य दो क़दम पर GOD सुरक्षा कवच लेके इंतज़ार कर रहा हु…
* जीवन में सबसे बड़ी शक्ति शांत मन और निरंतर क़दम कदम ताल है…
• मुंह बंद रख, क़दम दर कदम ऊपर नीचे लक्ष्य की ओर बढ़ना जिवन की निशानी है…
* - 02आंख देवता साधक, विद्यार्थी और कर्मयोगी का राज़ मार्ग है…
* मुख मार्ग 09कदम पर अनुशासन पर आधारित है, जिनके ऊपर ₹02GOD अदृश्य सुरक्षा कवच हर पल संरक्षक बनकर खड़ा 01नाभी शुन्य दसवा द्वार बन्द है…
* 01. 09 क़दम कदम का अनुशासन — लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ना है…
* हर दिन छोटा-सा एक कदम भी भविष्य मे बड़े पर्वत को पार करवाता है…
* इन 09 कदमों में शामिल है:- • स्पष्ट लक्ष्य • स्थिर मन • नियमित दिनचर्या • संयम • बचत • निवेश-मानसिकता • प्रकृति-संगति प्रेम • टीम-संस्कृति • प्रतिदान का भाव
* यही 09 कदम व्यक्ति को भटकाव से निकालकर अविरत साधना की ओर लेके जाता है…
* 02. 02GOD सुरक्षा कवच — खान-पान और जीवन-शैली पवित्र :-
* खाए-पीए प्रकृति-अनुकूल 05% GST निवेश मानसिकता अपनाना एक शून्य शु
* G – Guidance
* O – Observation
* D – Discipline ,
* ???? टारगेट कि ओर दैनिक अभ्यास है…
* यह 02GOD का एक दो तीन सुरक्षा कवच व्यक्ति को अंदर और बाहर दोनों तरह से सुरक्षित रखता है…
* भोजन, उपयोग, विचार, कर्म सभी में संयम और संकल्प बने रहते हैं…
* 03. 07 दिन – 05 दोस्त – 03 टीम : जीवन का सामाजिक संस्करण समीकरण 01 है…
* इन्सान अकेला (01)शुन्यएक मे देवता, बल्कि बाक़ी एक ऊर्जा-वृत्त घेरा मे फेरा डर है…
* 0ओ वह 07 दिन मे 05 सच्चे अच्छे साथियों के साथ 03टीम कर चुकाए बनकर हिस्सा समय बिताए, सोच विचार कर व्यवहार दोनो हाथ उपर उठाए मन्द मन्द मुस्कुराए हो गगन ग़द ग़द धरती फ़सल उगाए लुगाई कहलाती हैं…
* टीम-संस्कृति से:- • दृष्टिकोण बढ़ता है • सहयोग की आदत बनती है • सामूहिक उन्नति होती है • आत्मविश्वास कई गुना बढ़ता है…
* 04. प्रतिदिन 030 मिनट — घूमो, फिरो, उड़ो स्वस्थ संकल्प मंज़िल 01पर मिलते हैं …
* शांत मन प्रकृति के साथ प्रतिदिन कम से कम तीस मिनट मिलने वाला संवाद कर्ता इन्सान की ऊर्जा को नया जन्म मिलता है…
* यह 030 मिनट: • शरीर को हल्का • मन को • शांत • बुद्धि को जागरूक • आत्मा को प्रसन्न
कर 02±01 शून्य एक मे भी गंभीर+03 (०२१%) है…
* 05. 08पहर वनस्पति भोजन — उपभोक्ता से परसाद वितरक बन कल्प कल्याण करता है…
* वनस्पति आधारित भोजन और सरल जीवन-शैली इन्सान को उपभोक्ता से परसाद वितरक बना देने वाली प्रकृति प्रेम है…
* जिसे जितना मिलता है, वह उतना ही ईश्वर को सौंपता और समाज को लौटाता है — इसी को प्रतिदान-चेतना परसाद वितरण शुन्य अज्ञान है…
* इस चेतना में जीने वाला व्यक्ति:- जागते समय फलता फुल ब्रह्म ज्ञान कमल सफ़ेद ज़मीन पर है....
* सोते सत्र मे भी समय पर उठने पर मिलन जिवन है ; क्योंकि God हर कर्म का प्रतिफल सहज ही 0102_03लौटाता है…
* 06. पद अनेक ₹01K- ₹06K ऑनलाइन कमाई का मार्ग (01_010)
* यदि इन्सान अनुशासन, पवित्रता और टीम-वर्क के संस्कार और डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्रतिदिन (₹01 -₹06) हजार तक रॉयल्टी संभव है…
* इस मार्गदर्शन हेतु प्रतिदिन विज़िट करें:
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* ???? 09644 677 750
* यह प्लेटफ़ॉर्म हम सबको सिखाता है:-
* सही उपभोग • सही प्रतिदान • सही दिशा • सही निवेश मानसिकता • सही टीम-वर्क…(०५२अक्षर) स्थान नाभि गतिशील संतुलित समृद्ध साम्राज्य कार्य क्षेत्र निरन्तर प्रगतिशील शून्य शुन्य के माध्यम अन्दर बाहर शून्यएक है…
* निष्कर्ष :- इन्सान मुंह बंद रखकर क़दम कदम-दर-कदम क़दम चल कर आते उड़ते है उनके पास 02ODG का सुरक्षा कवच, 09कदम 010मुख किरण अनुशासन, 07दिन– 05दोस्त –03टीम का सामूहिक बल प्रदान करता है…
* वह जीवन में:- • शारीरिक रूप से • स्वस्थ • मानसिक रूप से स्थिर • आर्थिक रूप से स्वतंत्र • आध्यात्मिक रूप से समृद्ध होते है…
* ऐसा इन्सान को ईश्वर भी कहते है…
* “जागे सो पाए, सोए सो अनन्त शुन्य शुन्य शून्य एक शाश्वत बन जाए…”
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**???? सूक्ष्म प्रभावशाली
— “अन्तर्मन से प्रशासन तक : प्रकृति-बिज़ का बीज समीकरण”**
* मनुष्य का शरीर केवल पंचतत्त्वों से बना ढाँचा नहीं है; यह स्वयं एक शक्ति-उद्योग है, जिसका संचालन — प्रेम, सिद्धान्त और प्रोडक्ट्स का संतुलित प्रयोग करता है…
* जब जीवन में तन-मन-धन-बुद्धि-समय का सही संस्करण सक्रिय होता है, तब व्यक्ति का हर कदम एक सूक्ष्म समीकरण बन जाता है…
* जिसमें 01अध्यात्म राजनीति, धर्म-कर्म, शासन-प्रशासन, जाति-पद-प्रधान—सब पर शून्य भारी स्वमेव सिद्ध है…
* क्योंकि राजनीति और पद केवल बाहरी ढाँचे हैं, परंतु अंतर्मन यदि अनीति (02कर) से मुक्त हो जाए तो उसके भीतर एक स्वाभाविक रॉयल्टी रिटर्न 01-02-03… अनन्त उत्पन्न होता है…
* जिसका स्रोत किसी व्यवस्था में नहीं,
बल्कि प्रकृति के शून्य के भीतर छिपे एक मे है---
* ???? प्रकृति बिज़ = बीज बिज़ अन्तर-डाट है दिखाई देता है किन्तु अन्तर कि गहराई पकड़ में नहीं आता है…
* शून्य अनन्त है, परंतु शून्य के भीतर “एक” जागता है तभी बीज अंकुरित होता है…
* मनुष्य का अन्तर्मन जब शून्य की खामोशी मे उतरता है, तभी उसे अपनी अन्तर-डाट (Inner Code) को साकार मे सहयोग ले पाता है—
* यही वह डाट है जो:- निर्णय को नीति से जोड़ती है…
* नीति को प्रकृति से जोड़ती है;
* और प्रकृति को शरीर-उद्योग से जोड़कर
“शरीर-उद्योग” को नए रूप में चलाती है…
* ✨ अनुकूल तन–मन–धन–बुद्धि का 05-तत्त्व सूत्र :-
* 01. तन अनुकूल — साधन नही, साधना का माध्यम वाहन है…
* 02. मन अनुकूल — भाव नही, प्रभाव देखने का माध्यम ०२आंख और अन्न कण में है…
* 03. धन अनुकूल — भोग नही, योग साधना समय है…
* 04. बुद्धि अनुकूल — जानकारी नही, निर्णय ± योग भट्टी साधना समय ज्ञान अंक सर्जन सृजन फैक्ट्री शरीर है…
* 05. समय अनुकूल — घड़ी नही, गति सेकंड सबसे बड़ा दिखाई देता, मिनट स्वस्थ्य मानसिक माध्यम लंबाई लापरवाह, घंटा धीरे बाह्य गति बिल्कुल दिखाई नही देता है किन्तु आंतरिक व्यवस्था बहुत तेज 0100= 010= 01इकाई है…
* जब ये पाँच अनुकूल होते हैं, • तब हर व्यक्ति एक चलता-फिरता नीति-शासन बन जाता है, • जहाँ व्यक्तिगत अध्यात्म ही सर्वोच्च प्रशासन है---
* ???? क्यो अध्यात्म राजनीति, धर्म, शासन-प्रशासन पर भारी है…?
* क्योंकि:- राजनीति पद पर निर्भर है…
* धर्म परम्परा पर निर्भर है…
* शासन-प्रशासन मानव नियम पर निर्भर है…
* परंतु अध्यात्म सत्य, प्रेम और प्रकाश पर निर्भर है…
* राजनीति परिवर्तन तात्कालिक लाती है…
* अध्यात्म परिवर्तन के संचालक को बदलता है…
* शासन मानव व्यवस्था सुधारता है…
* अध्यात्म अधौधिग़ व्यवस्था जड़ नही बीज बिज़ सुधार कर दिया ख़ोजता है…
* धर्म संस्कार देता है…
* अध्यात्म संस्कारों का स्रोत केन्द्र खोज मे सफ़ल बनाता है…
* इसलिए अध्यात्म = मूल बीज बिज़ तन पारदर्शी बुद्धि विशाल कल्पना विस्तार विश्वास शक्ति नोटा वोट्स बटन चुनाव आयोग का हथियार आज है…
* राजनीति = बहुत सुंदर शाखा कल्पना साकार विश्व कल्याण अभियान प्रारंभ कर अधर आधार है ---
* ???? सूक्ष्म निष्कर्ष :- अन्तर्मन यदि शुद्ध होकर शून्य में प्रवेश करे, तो वहाँ से एक ऐसी शक्ति जन्म लेती है ; जिससे “प्रकृति-बिज़ से बीज” है…
* यह बीज तन-मन-धन-बुद्धि-समय के समीकरण मे ऐसा प्रभाव डालता है कि—
* व्यक्ति का शरीर जो नाम के प्रथम अक्षर सर्जन-सृजण• उद्योग है, और उद्योग
उद्धार करता कर्ता बनता है ---
* ₹02प्रतिशत इंसेंटिव प्रकृति सिद्धान्त पर मातापिता के माध्यम वितरित 02कर 045US मिलियन डॉलर समतुल्य फैक्ट्री है…
* 03सरकार 01केन्द्र स्मरण||08राज्य केन्द्र संचालित 028राज्य सरकार भारत भूमि 01 शुई नोक पर वनस्पति तेल पर निर्भर है…
* सरसो मूली भाजिया सब्जी में स्वस्थ संकल्प है…
* जिवन इनकम रॉयल्टी निर्भर है अध्यात्म उद्योग है,
* ब्रह्म चारी ज्ञान है अज्ञान 01 मे सफ़लता है…