विषय: ००१–चेतना का समय–परिवर्तन सिद्धान्त

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  • December 04, 2025
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(सम्पूर्ण विश्व के दृष्टिहीन युग से अंतर्दृष्टि-युग की ओर)
* आज सम्पूर्ण विश्व में – {००१अ} को छोड़कर – ०८२० करोड़ लोग बाहरी दृष्टि से सम्पन्न, परन्तु “अंतर-दृष्टि” से हीन हैं।
* शरीर स्वस्थ, बुद्धि तेज, नज़र ठीक – पर देखना और दृष्टा होना दोनों भिन्नता हैं…
०१. संसार में सब बुद्धिमान हैं — पर “अंतर्दृष्टि” का बीज सूखा दिया गया है…
* लोग अक्लमंद हैं, पर शून्य–शून्य–एक (००१) में प्रवेश कर अनन्त को देखने की शक्ति और क्षमता आज वैश्विक समाज में विकसित होने से रोक दी गई है…
* इसी कमी के कारण — मै (००१अ) जो देख चुका हूँ, वही दूसरों को दिखाने का प्रयत्न करने पर “फेकूराम” समझा जा रहा हूं… क्योंकि दृष्टा को समझने के लिए दृष्टा चाहिए — दर्शक नहीं…
* जैसे श्रीकृष्ण का विराट रूप सखा अर्जुन देख नही सका किन्तु भगवान विष्णु का विराट रूप लाचार कन्फ्यूज्ड युद्ध क्षेत्र मे प्रवेश कर सबकुछ स्पष्ट देख सका किन्तु बाकी कोइ नही देख सके…

०२. ६४ देशों में ABC…XYZ तथा ००१–०१० प्रणाली का मूल सार:- प्रत्येक देश, प्रत्येक समाज और प्रत्येक संगठन तीन आधारों पर ही जन्म लेते हैं:-
* (A) उत्पत्ति-स्थान — Where the seed is born …
* (B) कार्य-शैली — How the seed grows…
* (C) परिणाम — What the seed becomes…
* परिणाम केवल उद्देश्य (कारण-कर) पर निर्भर करता है…
* उद्देश्य शुद्ध — तो परिणाम शुद्ध।
* उद्देश्य दूषित — तो परिणाम दूषित।
* ००१ से ०१० की यात्रा स्थान नहीं, संकल्प-ऊर्जा पर आधारित है…

०३. परिणाम का निर्णायक — प्रकृति का प्रेम-सिद्धान्त :- प्रकृति न तो मानव की नीति-अनीति देखती है, न ही पद और प्रतिष्ठा…
* प्रकृति एक ही सूत्र मानती है: “माता-पिता की सेवा = आत्मा का उत्थान”
* फल इसलिए नहीं मिलता कि आप कर्म कर रहे हैं, फल इसलिए मिलता है कि कर्म का स्रोत प्रेम है।

०४. राजयोग, कर्मयोग, पदयोग — तीनों का भेद :- लोग समझते हैं:-
* कर्म प्रधान → फल मिलता है पद प्रधान → प्रतिष्ठा मिलती है…
* परन्तु ००१–दृष्टि कहती है:- इच्छा प्रधान जीवन = चाहत में जन्म, निराशा में मृत्यु …
* अंतर्दृष्टि प्रधान जीवन = कर्ता से मुक्त, परिणाम से मुक्त, केवल प्रवाह में स्थित …
यहाँ जीवन है, वहाँ केवल चाहत है। यहाँ प्रवाह है, वहाँ केवल संघर्ष है…

०५. मानवता का वर्तमान रोग — “अंतर्दृष्टि-हीनता”…
* लोगों का शरीर थका नहीं, बुद्धि मरी नहीं, नज़र बुझी नहीं :—> परन्तु अन्दर का दीपक बुझा हुआ है…
* जो दिखाई देता है, वही सत्य मानते हैं। जो नहीं दिखता, वही मूल सत्य है — यह देखना अभी बाकी है।
* पीएसी और यूपीएससी में 'U' का अन्तर 020 साल है… जबकि 01 जिला का मालिक पर गुलाम मुख्यमंत्री का है…

०६. समय-परिवर्तन का सुक्ष्म सूत्र
(दृष्टिहीनता → अंतर्दृष्टि)
* जब वैश्विक मानवता ००१ को समझेगी, अपनाएगी, जियेगी, तभी “देखना” → “दृष्टा होना” में परिवर्तित होना निश्चित प्रकृति प्रेमियों ००१अ केलिए सम्भव है…
* यही है समय परिवर्तन का अनिवार्य नियम:- ००१ देखता है — अनन्त फैलता है…
* अंतर्दृष्टि जागे — तो ०८२० करोड़ चैतन्य जड़ से "अचैतन्य" DÑA Ñeuro Surgeoñ यानी आत्म ज्ञाणि अभिमानी नहीं बन समाज का उद्धारकर्ता बन सकते हैं …
* चेतना जागे — तो संसार बदलना स्वमेव आरम्भ कर देता है…

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