परफैक्ट मै इंजीनियर हु, वृक्ष परफैक्ट हैं

परफैक्ट मै इंजीनियर हु, वृक्ष परफैक्ट हैं

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  • September 29, 2025
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परफैक्ट
मै इंजीनियर हु, वृक्ष परफैक्ट हैं
परफैक्ट : वृक्ष
* प्राणी, प्राणि, समाज निर्माण का आधार अधर मे लटका हुआ है…

* पेड़ पौधे मात्र हरियाली के प्रतीक है…
* किणतु वृक्ष परफैक्ट है…
* क्योकि वे संपूर्ण जीवन चक्र को संतुलित और पोषित करते हैं…
* वृक्ष ही वह पृथ्वी का वरदान उदाहरण है जहा से मनुष्य जाति, प्राणी और सम्पूर्ण समाज को जीने का आदर्श मार्ग दिखाता है…
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01. प्राणि प्राणी : जीवन की गहराई का रहस्य है…

* प्राणी : पशु पक्षी जानवर जलचर नभचर जन्म-मरण से जुडे देहधारी प्रधान मुख प्रधान अनुसरण कर्ता होते हैं…
* प्राणी जातियों का नामकरण प्राणियों अर्थाथ नर मादा के द्वारा वन्य प्राणी और प्रकृति सिद्धाणत पर प्रजनन क्रिया प्रतिक्रिया एकशून्य से शून्यएक प्रारंभ हो कर के आदान प्रदान पर किया गया है---

* प्राणि : वह जो जीवन मे प्राण, चेतना और उद्देश्य को पहचानता है, किन्तु गुरु अपने शिष्य जिवन का शिष्टाचार को भुलकर उन्नति करना चाहता है किन्तु वह उन्नति न रह कर अउन्नति हो जाती है---

* प्रकृति सिद्धांत पर शिष्य गुरु से ऊपर उठ कर गुरु केलिए भी प्रेरणा स्रोत बन सकता है---

• इच्छुक वीद्यार्थी गुरु का उद्धार कर्ता फ़रिश्ता स्वरूप ॐ शीष्य संतुष्ट से परम संतुष्ट आत्मा भाई' भाई बन, नई अच्छाई के साथ नई उच्चाई को छू, इतिहास रचते है---

* वृक्ष केवल तना नही है – जड़, पत्ते, फूल, फल, छाया भूमि और बिज़ से देकर अपना पूरा जीवन सार्थक कर लेता है…

02. जानवर – नर – नारायण – णारायण की यात्रा…

  01. जानवर : केवल भौतिक आवश्यकताओ तक सीमित है…

* प्रकृति बिना मांगे जनवरो की आवश्यकता पूर्ति स्वयं प्रकृति अपने स्वर और सुगंध फ़ैला कर जीवन चक्र पूर्ण करने मे सक्षम बना देती है…जैसे अंधेरे मे चलने केलिए आंखों मे टॉर्च जैसी रोशनी जन्म से पहले ही वरदान ???? स्वरूप अजर अमर है…

 02. नर : विवेक और विचारशील गतिशील प्रगतिशील बंधन मुक्त सुगंध की ओर क़दम बढ़ाता है---…
* प्राकृतिक दृष्टि से सेवा कर अटूट संबंधन निर्मित करता हैं…

* मनुष्य अप्राकृतिक अपरिपक्व इच्छा रहित बे समय दिशा हीन मेहनतकस, जबरिया संबंध स्थापित करने वाले हवस पूर्ति मे माहिर अधरम से गर्भ धारण करने कराने वाले इमानदार और बेईमान दोशून्य से आठ नौ शुन्य शून्य तरह के होते हैं…

  03. नारायण : लोकहित और समाज सेवा मे जीवन को समर्पित करता से कर्ता बनता है…

* नाम का पहला अक्षर "ना" से अणक मूल्य के आधार पर 0201 और अधर मे 0021, 2100, 0210, 030 इस प्रकार भूमि की गति पर मिलन निर्भर करता है---

  04. णारायण : 0369_9630प्राण, परिश्रम और परमार्थ से सम्पूरण विश्व-कल्याण का वाहक बनता है…

* प्रकृति सिद्धांत पर चलने वाला इमानदार 01- 001, 1001, सम्पूरण 010 को आर्थिक समृद्ध बनाता है…

* प्रकृति सिद्धांत पर परिवर्तन कर सृजन करता प्रेमी युगल सर्वश्रेष्ठ सफ़ल होते हैं…

* मनमत हो कर नतमस्तक कर सहित जनमत संग्रहण हेतु भ्रम फैलाकर, दो हाथ जोड़ नतमस्तक हो अपनी स्वतंत्रता नीलाम करता है…

* यह क्रम दर्शाता है कि जैसे वृक्ष बिज़ से पल्लव, फिर फ़ल और अंत में नये वृक्ष का आधार बनता है…

* मनुष्य का विकास क्रम व्यक्तिगत से सामूहिक और फिर दैवीय स्तर तक जाता है…

* देश हित को भूल आज पद की आकांक्षा मे सभी हदें पार कर, जीत हासिल करना चाहते है…

* पद्मासन मिलते ही सेवा भूलकर भ्रष्टाचार मे सम्मिलित हो तन दोहन मे मसगुल और निरमोही रोल अदाकार हो ज़मीन हड़पने का खेल खेलता है…

03. प्रगतिशील समाज और वृक्ष का मॉडल…

* जड़ें : संस्कृति, परंपरा और नैतिकता का ज्वलंत उदाहरण है…

* तना : संगठन, अनुशासन धैर्य और परिश्रम का अटूट संबंधन निर्माण का उदाहरण है…

* पत्तियाँ : शिक्षा, विज्ञान और कला परिपक्व हो गिरना झड़ना उड़ जाना, जल गलना जाना मौन की शक्ति मूल्य स्थान सुझाव परिवर्तन विशेषज्ञ डॉ को दर्शाता है---

* फूल : मूल्य, आचार, सदाचार, खुशबू मनमोहन, गले का हार फ़िर जीत प्रकृति सिद्धांत पर चलने को प्रेरित कर प्रेरणा का काम करता है…

* फल : जनकल्याण, समानता, समृद्धि असणतुष्ट बिज़ फ़ल से पुनः शूणय मे समा, अंकुरण की योग्यता, लडने की हिम्मत और शक्ति दोनो एक साथ, आदिकाल का उदाहरण है…

* ➡️ ऐसा समाज जहा प्रत्येक नागरिक वृक्ष की तरह "देने वाला" बनेगा, वहीं प्रगतिशील राज्य खड़ा होगा…
* घर, घर नहि कर उद्योग संग्रहण केन्द्र और वितरण का माध्यम बन जायेंगे तो…
* स्वयम ऋण धन मुक्त, कर समानांतर व्यवस्था सुधार मे बराबर का हिस्सेदार बन राज्य देश विदेश कल्याण मे मार्गदर्शक का रोल अदाकार, विद्यार्थी स्वरूप ॐ परम शांति स्थापन दूत कहलाएगा...

* चले हम एक एक शून्य शुन्य घर घर अलख जगाए और अपनी और देश की आर्थिक आजादी मे सहयोगी बन, ऋण मुक्त देश भारत बनाए …

04. राज्य सरकार के लिए मार्गदर्शक अनुभव…

  01. प्रकृति अनुशासन पसंद करती है---
* वृक्ष बिना शोर किए फल देता है, सरकार को भी बिना दिखावे के सेवा करनी चाहिए…

* लोभ लालच दोष कीड़े मकोड़े की नीति छोड़ बड़ा महत्वपूर्ण से महत्वहीन, जंगली जानवर की तरह भेद करना, इमानदार ईमानदार प्राणि प्राणी के ज्ञान विज्ञान अध्यात्म संयुक्त राष्ट्रीय उद्धार कर्ता फ़रिश्ता स्वरूप ॐ इन्सान मूल्यवान शब्द स्वत परिणाम दाता मुखिया और हस्ताक्षर शून्य शुन्य दो का अंतिम संस्कारमय होना है…

  02. शुन्य एक समान वितरण नीति…
* वृक्ष सबको छाया फल एक समान रूप से देता है…
* वैसे ही राज्य की नीतियाँ समानता पर आधारित होना आवश्यक है…
* ग़रीब अमीर, विशिष्ट, अतिविशिष्ट की परमपरा छोड़, नैतिक मूल्य आधारित व्यवस्था निर्माण की ओर लगातार वृद्धि कलेक्शन पर ध्यान केणद्रित करने की आवश्यकता है…

  03. आर्थिक आज़ादी की जड़ें…
* वृक्ष जैसे धरती से जल और लवण खींचकर शाखा पत्ती फूल को फल के जीवन मे बदलने का काम करता है…
* ठीक उसी प्रकार से राज्य शासन अपने संसाधनों का सद रूपांतरण, जनकल्याण और प्रकृति सिद्धाणत कि शिक्षा नीति, राजनीति धर्मशास्त्री उद्योगपति वैज्ञानिक अध्यात्मिक राजगुरु, मुखिया को सबसे पहले शून्य शुन्य एक की कहानी सुनना जरूरत है…

  04. सहजीवन की नीति – पक्षी, पशु, मानव सब वृक्ष से जुड़े हैं…
* समाज की सभी जातिया, वर्ग और व्यवसाय आपस मे जुड़े हुए हैं...

* राज्य में स्थापित समस्त उद्योग व्यापार व्यवस्था को प्राकृतिक सिद्धांत, मानदंड और संचालन, प्रबंधक को लागू कर लघु उद्योग का दर्ज़ा दिया जाना आवश्यक है…---

  05. मार्गदर्शन : अनुभव से राज्य निर्माण…
* प्रत्येक नागरिक को नर से नारायण बनने की प्रेरणा दी जाने वाली कार्यशाला आयोजन की पूरी तैयारी स्वयं सेवक के अधीन रखने की आवश्यकता है…

* शिक्षा व्यवस्था में "प्रकृति और प्राणी" का गहन अभ्यास अनिवार्य योग्यता घोषित करने कि आवश्यकता है …

* शासन का लक्ष्य सिर्फ़ विकास नहीं, बल्कि सतत जीवन (Sustainable Life) हो…

* नेतृत्व वृक्ष की तरह निस्वार्थ और फलदायी होना चाहिए…---

✨ निष्कर्ष …

* वृक्ष हमे सिखाता है – देना ही जीना है…
* जब मनुष्य "जानवर" से आगे बढ़कर "णारायण" बनेगा और शासन वृक्ष की तरह स्थायी, पोषणकारी और संतुलित बनेगा, तभी प्रगतिशील समाज और राज्य सरकार का निर्माण असंभव से संभव होगा, पक्का है---

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