विषय: प्रकृति प्रेम “001ÄĒZ (अर्ज़–फ़र्ज़)”
विषय : प्रकृति प्रेम “001ÄĒZ(अर्ज़_फ़र्ज़)”
• थीम को सरल, स्पष्ट हिन्दी में भावार्थ सहित समझा जा सकता है…
• यह विषय मनुष्य की पाँच विकसित भूमिकाओं का दर्शन प्रस्तुत करता है…
• जहाँ व्यक्ति साधारण नहीं, उत्तरदायी और आदर्श है…
• 001ÄĒZ अर्ज़ – भावार्थ :•:
• 001 = जागृत एकक (Self-Aware Individual)
• 0_0 भुमि केन्द्र से अकाश केन्द्र संतुलन सरकार है… पंच से देश मुखिया वोटर 001 है…
• ÄĒZ = आधार → ऊर्जा → ज़िम्मेदारी
अर्थात्: एक जागृत मनुष्य, जो नाम कि ऊर्जा आधार है पर ऊर्जा का सही उपयोग करते हुए समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाता है…
• i. Men as Real Royalty Tree (वास्तविक राजसी वृक्ष) :•:
• मनुष्य एक वृक्ष का बिज़ बीज रोशनी है—
• जड़ें :•: संस्कार व मूल्य…
• तना :•: चरित्र व अनुशासन…
• शाखाएँ :•: परिवार, समाज, राज्य, राष्ट्र, 0200विदेश…
• फल: सेवा, सुरक्षा, समृद्धि वरदान परसाद शुन्य दो कर नियम जिवन समय इनकम टैक्स है…
• वास्तविक राजसीपन सत्ता नहीं, पालन- पोषण, जिम्मेदारी समय वृद्धि के साथ पद सिंहासन है…
• ii. Men as Ceut Crown Politician (चेतन मुकुट राजनीतिज्ञ)…
• यहाँ राजनीति का अर्थ सेवा की चेतना है…
• मुकुट = अहंकार नहीं, जवाबदेही उत्तरदाई प्रणय प्रेम सिद्धान्त अनुसरण करता का ताज है…
• निर्णय स्वार्थ से नहीं, समूह-हित, सर्वहितय सर्वसुखाय से केन्द्र संतुलन सरकार है…
• ऐसा नेता विवाद नहीं, समाधान देता है, मुदा नही हक़ीक़त का बयान करता, पद नही पद कि गरीमा पर ध्यान शिरोमणि नमन करता है…
• iii. Men as Spiritual Ambassador (आध्यात्मिक राजदूत)…
• मनुष्य अपने आचरण से शांति का संदेशवाहक है…
• धर्म शब्दों में नहीं, व्यवहार में दिखाई देता है…
• जोड़ने वाला होता है, राज्य देश भक्ति सर्वोपरि नज़र वाला प्राणि प्राणी प्रेमी चरित्रवान नाभि रक्षक समृद्ध साम्राज्य सूत्रधार होता है…
• जहाँ जाए, वहाँ संतुलन सहमती संस्कार छोड़ने में माहिर होता है…
• iv. Men as GOD/ GMP / eGST Industrialist (नैतिक औद्योगिक निर्माता)…
• उद्योग लाभ + लोक-कल्याण और पार्टनर्स के लिए सुनहरा अवसर मनपसंद व्यंजन निर्माण है…
• GOD:•: जनरेटर ऑपरेटर ड्रीमर भविष्य दृष्टा और एक क्षण मे डिस्ट्रॉय करने मे माहिर बनता फैलाता अधिकार प्रकृति प्रेम से प्राप्त वरदान दाता है…
• GMP = शुद्ध उत्पादन, सुरक्षित गुणवत्ता, प्रकृति सन्तुलन बिज से हथेली से मुख शुद्धि बुद्धि समय संस्कार स्वास्थ्य सुरक्षा देशहित पहरेदारस्वयं भूमिस्वामि शरीर सुख परिवार वृध्दि स्वाद रहित षमाज पोषण पैशन अनुसरण उद्योगपति शरीरधारी है…
• eGST = पारदर्शिता, ईमानदार कर प्रणाली वास्तविक विश्लेषण करता केन्द्र नाभि संतुलित जीवन-व्यवस्था सुचारू संचालन सिद्धांत भुमि केन्द्र कर वरदान शून्यदोकर प्रतिदिन पाठ निभाना करदाता हक़ीक़त उर्जा संग्रहण मुख वंशावली करदाता है…
• ऐसा उद्योगपति शोषण नहीं, रोज़गार पैदा सौंदर्य के साथ अतिरिक्त आमदनी रॉयल्टी प्रोसुमर लिडरशिप प्रमोट करता है…
• v. Men as Honest Emperor (ईमानदार सम्राट)…
• सम्राट का अर्थ शासक नहीं, संयम दिशा सूचक कहानी नही हक़ीक़त शिक्षित स्वतंत्र बेरोज़गारी भत्ता वितरक नही उपभोक्ता प्रोसुमर अध्यात्म औषधि प्रसाद वितरण शुन्य शून्य दो कर सर्वश्रेष्ठ ऊर्जावान शरीरधारण करना काम वासना नही सिर्फ़ भगवान श्री कृष्ण राधा रानी विद्वान संस्कारवाण श्रीफ़ल जानबुझ पुत्र पुत्रि रत्न को कर स्वरूप जनम देती माता है …
• पहले स्वयं पर शासन—इच्छा, क्रोध, लोभ पर नियंत्रण न्याय सबके लिए एक समान सार रस कर पहचान है…
• ईमानदार सबसे बड़ी सत्ता प्रदान कर प्रधान है…
• जब मनुष्य बिज़ से वृक्ष बनता है, नेता बनकर सेवा करता है…
• आध्यात्मिक होकर मुखवंशावली में विलीन हो समुह विस्तार करता है…
• उद्योग में नैतिकता के साथ गुलाम और नौकर नही सहभागी हिस्सेदार बनता और बनाने के लिए प्रेरित करता और वितरक नही उपभोक्ता प्रोसुमर लिडरशिप इंटेंसिव इनकम भुगतान करता है…
• अध्यात्म औषधि प्रसाद फ़्री महफ़िल आम आदमी ईमानदार विद्यार्थी गुणगान करते है…
• ईमानदार ही स्वयं, स्वयं पर शासन करता है— तभी 001ÄĒZ अर्ज़ पूर्ण सूक्ष्म शुन्यएक लक्ष्य परिणाम स्वमेव फ़ल इमेज़ फलदार वृक्ष पैड है…
• अनादि मानव विकास, कर-सिद्धांत और चार धाराओं का समन्वय से विकास करते आता है…
• अनादि काल से धरती की उत्पत्ति के पश्चात मानव अपना विकास सतत करते आ रहा है…
• वंश संख्या बढ़ता गया, समूह बने, और धीरे-धीरे सभ्यता का उदय हुआ है…
• प्रारम्भिक अवस्था में मानव का जीवन अत्यन्त सरल था है न डर न लालच सहृदय प्रेम चाहता है…
• बच्चा पैदा करना, भोजन पकाना खाना, जल पीना और विश्राम करना स्त्री धरम करम बिना अज्ञान प्रशिक्षण प्रकृति स्वमेव सहायक है …
• भाषा, ज्ञान और नियमों के अभाव में यही जीवन-चक्र था, और आज भी मूलतः यही प्राकृतिक प्रक्रिया चल रही है…
• जैसे-जैसे मानव की समझ, ऊर्जा-जागृति और भाषा-प्रभाव बढ़ा, वैसे-वैसे समाज को संतुलित रखने के लिए मानव ने अपने लिए नियम बनाया है…
• इसी क्रम में मानव ने “कर” को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि वीर्य, ऊर्जा, श्रम और समय के आदान-प्रदान के रूप में समझा और उसे सर्वहिताय–सर्वसुखाय उद्देश्य से स्पष्ट रूप से चार मुख्य धाराओं में विभाजित किया…
• मानव समाज की चार मूल धाराएँ…
• अध्यात्म – आत्म-जागृति, संयम, नैतिकता और चेतना का विकास…
• शासन – नीति निर्धारण, संरक्षण और दिशा…
• प्रशासन – व्यवस्था, क्रियान्वयन और न्याय…
• उद्योग – उत्पादन, सेवा, वितरण और रोजगार…
• ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म, औषधि, प्रसाद वितरण और कर्म अधर आधार पर नियम बने है …
• राजा, प्रजापालक, मंत्री, सिंहासन, उपभोक्ता—सब भूमिकाएँ स्पष्ट होती गईं…
• समय के साथ झंडा, सिक्का और सीमाओं के आधार पर आज विश्व अनेक देशों में विभक्त है, पर मूल संरचना वही चार धाराएँ हैं…
• इमानदार विद्यार्थी और Pro-Sumer मॉडल
आजके समय / युग का इमानदार विद्यार्थीयो का युग है…
• जो केवल उपभोक्ता (Consumer) नहीं, बल्कि Pro-Sumer है; अर्थात सीखने वाला, बनाने वाला और समाज को लौटाने वाला इमानदार विद्यार्थी है …
• शिक्षा • स्वास्थ्य • रोजगार • सुरक्षा • देशहित
की दृष्टि से कार्य करे, तो वह कर चुका कर 010 आंख वाला इनकम का वृक्ष बनता है—जिसकी जड़ अध्यात्म में, तना उद्योग में, शाखाएँ शासन-प्रशासन में और फल सम्पूर्ण समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होता है…
• 001ÄĒZ : समानता और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था…
• चारों धाराओं में एकरूपता, समानता और पारदर्शिता से • भ्रष्टाचार-मुक्त • ऋण-मुक्त • भटकाव-मुक्त व्यवस्था निर्माण सहायक वरदान है…
• 001ÄĒZ समानांतर व्यवस्था सम्भव है…
• केवल 028 दिन से 010 माह में इमानदार विद्यार्थी 010% eGST कर संग्रहण परिपक्वता सिद्धांत के साथ कार्य करे, तो— • शासन • प्रशासन • उद्योग • अध्यात्म • धरती फ़सल बिज़ सिद्धांत चारों के योगफ़ल में दौलत विचार नही हकीक़त बिज़ मुखवंशावली बनता है…
• योगफ़ल से औषधि-रहित स्वस्थ शरीर, समाज का पोषण, और रॉयल्टी इनकम के साथ अतिरिक्त जीवन-यापन अतिरिक्त आमदनी रॉयल्टी सम्भव कराता है…
• निष्कर्ष :•: मानव जीवन का उद्देश्य केवल उपभोग नहीं, योगफ़ल बीज बिज़ प्रेमफ़ल है—
• जहाँ अध्यात्म दिशा देता है, शासन नीति कर प्रजाहितैषी बनाता है…
• प्रशासन व्यवस्था संभालता है, और उद्योग आत्मनिर्भरता प्रदान कर पार्टनर पोषण देता है…
• जब इमानदार विद्यार्थी इन चारों को जोड़ता है,
तब 006व्यक्ति से संतुलित समाज, समाज से राज्य_राष्ट्र, और राष्ट्र से विश्व-कल्याण का मार्ग स्वतः खुलता है…