* शून्य से एक अनन्त: 001ÄZ सिद्धांत और मानव क्षमता का लोकतंत्रीकरण बिज़ है। * आज की दुनिया एक विचित्र मोड़ पर खड़ी है।
* शून्य से एक अनन्त: 001ÄZ सिद्धांत और मानव क्षमता का लोकतंत्रीकरण बिज़ है।
* आज की दुनिया एक विचित्र मोड़ पर खड़ी है।
* मशीनें तेज़ हैं, सूचना बिजली की चाल से दौड़ रही है, बाज़ार चमकते हैं, पर मनुष्य अक्सर भीतर से खाली, अवसर मे उलझा और असंतुलित महसूस करता है।
* प्रश्न उठता है: जब इतना सब है, तो कमी कहाँ है?
* आज वास्तव मे इन्सान असंतुष्ट विद्यार्थी जिवन से ही है।
* कयोंकि आर्थिक गुलामी, संस्कार विहिन शिक्षा, डिग्री हि शिक्षक, जरूरत से कम इनकम, केंद्रीय / नाभिकिय ऊर्जा ज्ञान की कमी है।
* नाभिकीय ऊर्जा जन्म के पहले से शून्य शुन्य एक एक कण से xyz लेता है।
* एक विचार, एक प्रतीकात्मक सूत्र: 001ÄZ Concert।
* यह कोई केवल शब्द नहीं, बल्कि संकेत है कि शून्य से एक, बिखराव से व्यवस्थित और व्यक्ति से विश्व यात्रा असंभव से संभव है।
* 006दिनरात दिल मिलाप मे स्थाई सफ़लता प्रो शुमर मुखिया व्यवस्था प्रमाण है।
01. शरीर: सबसे पहला उद्योग :•: दो दिल नव माह नाभि मिलन, खान पान स्वयं एक महान उद्योग है।
* हृदय पंप है।
* मस्तिष्क नियंत्रण कक्ष है।
* फेफड़े ऊर्जा संयंत्र हैं।
* दो हाथ उत्पादन इकाई हैं।
* दो पैर परिवहन तंत्र हैं।
* त्वचा क्षेत्र सुरक्षा विभाग है।
* बाल और नाखून विकास के तंतु संकेत हैं।
* शरीर के प्रत्येक अंग स्वयम स्वयं केलिए कार्य करते हैं।
* पु|पूरा शरीर वृक्ष/ मशीन/ कंप्यूटर/ ट्रांसफार्मर सुचारु दैनिक स्व करम से चलता है।
* यही संदेश समाज, शासन, उद्योग और विश्व व्यवस्था पर भी लागू है।
* 02. नाम [DÑÄ] ~ {010dñæ}और न्यूरो शक्ति :•:
* हर नाम केवल पहचान नहीं, एक ध्वनि है।
* हर ध्वनि एक कंपन है।
* हर कंपन मन पर प्रभाव डालता है।
* DNA शरीर का बाहरी नक्शा है, और आंतरिक न्यूरो सिस्टम उसका संचार तंत्र है।
* विचार, शब्द और कर्म एक दिशा में चलते हैं, तब व्यक्ति भीतर से शक्तिशाली, बाहर शून्यशुन्य एक, शु कर से सदाचार ज़मीन नाभि अर्थिंग केन्द्र है।
* आज शू कुचालक है, चुंबकीय सु शू ßhoo है।
* 03. मुझ पर बिना काम बिना दाम क्यों लागु है?
* आज कई लोग महसूस करते हैं कि समय निकल रहा है, पर परिणाम कम हैं।
* इसका कारण अक्सर काम की कमी नहीं, बल्कि दिशा की कमी है।
* जब व्यक्ति अपनी शक्ति को पहचानता नहीं, तब ही वह काम कि तलाश मे इधर उधर श्रम कर भारी मन से विचलित है।
* जब व्यक्ति अपने आंतरिक शरीर कौशल को व्यवस्थित करता है, तब शारीरिक आंतरिक और बाह्य श्रम संपत्ति और आंतरिक उर्जा मनोकामना पोषण पैशन बनता है।
* 04. अक्षर, अंक और चिन्ह मे रहस्य छिपा है,
भाषा केवल बोलने का माध्यम नहीं है।
* अक्षर ज्ञान का बीज बिज़ हैं।
* अंक गणना का विज्ञान अध्यात्म औषधि हैं।
* चिन्ह व्यवस्था संकेत मात्र शून्य कोष्ठक प्रकोप मात्र नही हैं।
* जिस इन्सान/समाज ने इन तीनों को समझ लिया, उसने शिक्षा, व्यापार, तकनीक और संस्कृति कि उन्नति स्वयं धारण कर खेल खेल मे स्थाई सफ़लता प्रो शुमर बनता है।
* 05. प्रजातंत्रीकरण का अर्थ :•:
* प्रजातंत्रीकरण केवल राजनीति नहीं, यह अवसरों का वितरण है।
* ज्ञान सबके लिए, स्वास्थ्य सबके लिए, सम्मान सबके लिए, आय के अवसर पढाई लिखाई के शुरु करने के पहले से सबके पास है।
* निर्णय की दृष्टि गुरु अभाव स्वभाव भागीदारी सबके लिए, सेवा भाव मुल्य निर्धारण कर्ता ख़ुद कृषक मॉडल बीज बिज़ 001:010के फ़सल है।
* जब वृक्ष का रस केवल शीर्ष पर न रहकर जड़ों तक पहुँचे, तभी वृक्ष स्वस्थ रहता है।
* 06. शून्य शून्य एक का संदेश :•:
* 00 = खालीपन, तैयारी, संभावना
* 1 = शुरुआत, निर्णय, पहला अक्षर शाही कदम
* हर बड़ा परिवर्तन पहले शून्य शुन्य एक है, छोटा कदम वास्तविकता मे दिखता है।
* 07. सम्पूर्ण समाधान अक्षर मे स्वर छिपा है?
* समाधान बाहर बारह प्रतिषत से कम है, भीतर पन्द्रह करोड़ प्रो सुमर से अधिक है।
* प्रो शुमर अनुशासन, ज्ञान, सहयोग, प्रकृति के संतुलन, आत्मविश्वास और मनुष्य जब स्वयं को पुर जानता- समझता है।
* शरीर संरचना को बेहतर समझ कर आत्मनिर्भर प्राणि|णी सम्भोग संपति उत्पन्न करता है।
* निष्कर्ष :•: 001ÄZ इको जादुई कोड है, जो तीन नाम स्मरण शक्ति और वातावरण जंगली प्राणी शेर नर भक्षी है।
* शून्य से शुरुआत कर दाता खाता और छ: कक्षा, सात संकल्प चला आ रहा है।
* व्यक्ति से समाज बदलता है, शरीर से देह देश और विश्व एकसमान नियम पर चलता है।
* संतुलन, श्रम और चेतना जो आज स्वयं को छोटा समझ रहा है, वही कल परिवर्तन का केंद्र बिन्दु नाभि समुद्र जैस पानी से भरा हुआ हक़ीक़त है। ????♾️
* केन्द्र शून्य से मत डरो, प्रवेष फ़्री महफ़िल आम रस पी रहे है।
* जागना सूर्योदय दर्शन दर्पण एक नवजीवन जन्मता है।
* कल का गुरुकुल, आज 001ÄZ है।
* समय एक नदी महासागर से मिला है।
* किनारे बदलते हैं, पर जल अपने स्वभाव से सदैव बहता ही रहता है।
* 001ÄZ नया विचार-मंच है, पर मूल प्रश्न वही है: ज्ञान कहां, कैसे मिल जाए जिवन इनकम उद्योग सेल्फ हेल्प प्रोग्राम प्रो सुमर साम्राज्य द्विव्य दृष्टि नाम राज़ सिस्टम महान है।
* कल का गुरुकुल :•: प्राचीन व्यवस्था में शिष्य केवल पढ़ता ही नहीं था, जीवन जीना, मर्यादा व्यावहारिक अनिवार्य शिक्षा भी सीखता था।
* विनम्रता से भिक्षा माँगता, श्रम करता, गुरु परिवार की सेवा करता, कम में संतोष सीखता, ज्ञान के बदले कृतज्ञता पाता, भिक्षा केवल अन्न संग्रह नहीं, वह समाज और शिक्षा का सेतु थी।
* शिष्य कहता : मैं सीख रहा हूँ, मुझे सहयोग किजिए।
* समाज कहता : तू सीखेगा, तो हम सब ऊँचे और राज़ सिंहासन महान भारत भूमि है।
* आज के समय में, पुरा दृश्य बदला हुआ है।
* लोग डिजिटल दुनिया में सीखते हैं, अजनबी भी सहायता करते हैं।
* ऑनलाइन गुरु, वैश्विक शिष्य, भीड़ है, पर जुड़ाव कम है।
* अवसर हैं, पर दिशा धुँधली है।
* अब भिक्षा का रूप स्वरुप दान फि फिल्म कर चलचित्र बदला है।
* कोई नौकरी माँगता है, कोई फॉलोअर है, कोई फंडिंग, कोई अवसर, कोई मार्गदर्शन की आस मे भटक रहा है।
* 001ÄZ का संकेत :•: यदि इसे प्रतीक मानें, तो इसका अर्थ है:•:
0 = खाली पात्र बनो…
0 = अहंकार छोड़ो…
1 = ज्ञान भाव अनन्त लेकर जागो उठो…
* कल शिष्य पात्र लेकर गाँव जाता था, आज व्यक्ति प्रोफ़ाइल लेकर संसार में ऑफिस ऑफिस घूमता है।
* कल आशीर्वाद केलिए हाथ उठता था, आज अवसर, सहयोग, नेटवर्क, मार्गदर्शन के रूप में गले मिल रहे है।
* अंतर कहाँ है?
* कल शिष्य पहचान से नहीं, पात्रता से बनता था, आज कई बार पहचान पहले, पात्रता बाद में देखी जाती है।
* कल सेवा से सम्मान मिलता था, आज दिखावा प्रदर्शन से भी मिलता है।
* कल गुरु का घर छोटा था, पर दृष्टि बड़ी, आज मंच बड़े हैं, पर धैर्य छोटा, फ़ीस बड़ी है।
* सीख क्या है, प्रश्नपत्र उत्तर शीट अंक काफी, पी कर टेबुल लेशन कर है?
* पुराने गुरुकुल की आत्मा आज भी उपयोगी है,
* विनम्रता, अनुशासन, सेवा, ज्ञान सम्मान, समाज से जुड़ाव, अर्जित कर साझा करना स्वभाव, भागीदारी प्रेम ब्रह्मचर्य सिद्धान्त शुद्ध रक्त-परवाह फ़ल प्रोसुमर लिडर पहचान है।
* निष्कर्ष :•: कल शिष्य भिक्षा माँगकर गुरु परिवार चलाता था।
* आज अजनबी भी किसी को अवसर देकर जीवन बदलता है।
* युग बदला है, सूत्र नहीं: जो सीखता है, वही पाता है।
* जो बाँटता है, वही बढ़ता है।
* जो झुकता है, वही उठता और आगे बढ़ता है। ????