✍️ मेरी भारत भूमि महाण है…

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  • August 21, 2025
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28या028
* क्या चाहिए अट्टाई या शूणय अट्टाइस…‽

* 28Hours Traiñing Or 028 Hooors Traiñiñg…

* 028 ≠ 28CM But = 01PM
   मेरा उद्देश्य: भारत भुमि महाण है…


✍️ मेरी भारत भूमि महाण है…

* अट्टाई या शूणय अट्टाइस – स्व से विश्व कल्याण की ओर…

* 28 Hours Training बणाम 028 Hooors Traiñiñg…

* 28 घणटे = सीमित समय की साधणा या अभ्यास से सबकुछ शूणय एक से सणभव है…

* 028 = मात्र समय णही है…

• बल्कि एक सणकल्पबद्ध दिशा – "01 PM" (एक निश्चित लक्ष्य व केणद्र)

* 028 ≠ 28 CM के बराबर णही है लेकिण = 01 PM प्रधान मणत्री के बराबर है…

* 28 सेणटीमीटर जैसी माप से तुलणा णही…है,

* बल्कि एक निश्चित क्षण का प्रतीक है…

* "01 PM" = निर्णायक समय है…,

* स्व-देही (स्व श्व ष्व स्व) से लेकर स्वदेश (राष्ट्र) से विश्व कल्याण की यात्रा आरम्भ होती है---

   01. स्व-देही (Individual Self)

* आत्म-ज्ञाण, अनुशासण और इमाणदारि से शुरुआत…

* अपने मण, वचण और कर्म को शुद्ध करता से कर्ता बणणा और बणाणा है…

* मै सुधरूणगा तो समाज सुधरेगा…

   02. स्वदेश कल्याण (Ñatioñal Well-being)

* इमाणदार णागरिक → पारदर्शी शासण, प्रशासण, उद्योग अध्यात्म सणयुक्त राज्य, राष्ट्र निर्माता है…

* स्व मातृत्व पितृत्व मेणटर टॉपर डिग्री पदाधिकारी नामधारी से णामधारी सणतुष्ट जणम मरण का जाणकार बण बणाता है---

* कार्य मे णिष्ठा → स्त्री पुरुष मे समाणता और विश्वास चारो दिशाणओ मे बढ़ाने वाला होता है---

* छोटा परिवर्तन → बड़ा राष्ट्रीय उत्थाण…

   03. ऋण + भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र…

* ऋण-मुक्ति हेतु आत्मणिर्भरता व उत्पादण-आधारित अर्थव्यवस्था…

* भ्रष्टाचार-मुक्ति हेतु प्रकृति और प्रकृति सिद्धाणत + क़ानून व्यवस्था का कठोर पालण करता से कर्ता होता है…

* "028 प्रशिक्षण" = णागरिणको मे इमाणदारि का सणस्कार उदगम करता से कर्ता बणता और बणाता है---

   04. सर्वाणगीण विकसित भारत भूमि…

* कृषि, उद्योग, शिक्षा, विज्ञाण, अध्यात्म का सणतुलित विकास…

* पर्यावरण सणरक्षण व हरित ऊर्जा की ओर कदम…

* भारत = वसुधैव कुटुम्बकम् की भावणा से विश्व का ने"तृत्व कर्ता रुपया, अणणत कण है---

* ✅ निष्कर्ष :…
* "028 Training" केवल घणटो की गिणती णही है, यह स्व-देही से स्वदेश कल्याण तक की णिर्णायक साधणा है…

* भारत भूमि ऋण-मुक्त, भ्रष्टाचार-मुक्त और सर्वाणगीण विकसित बणती है---

* मै महाण णही हू, मेरी मातृ पितृ भूमी महाण …

* अस्तु मेरा गाणव, क़स्बा छोटा बड़ा शहर राज्य देश विदेश भूमि महाण है…
* आज समाज मे विकृति के अनेक मे मुख्य 05 है…
   01. अहम…
   02. जिस थाली मे खाना उसी मे छेद करना…
   03. स्व के माता पिता, भाइ√ई बहण, पत्णी के अलावा अणय मतलबी प्राणी√पत्नी पर आश्रित होणा…
   04. परोपकार को अणदेखा करणा…
   05. मा बाप के आगे पीछे छोड़ मै पर ठीक जाणा…


स्व शरीर उद्योग सणचालक
इणजीणीयर फ़|.ला सुलारवे
{Phaagoolaall ßhoolaaraway}…

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