सूक्ष्म–अति सूक्ष्म सरकार : शरीर के अंदर कि आंतरिक(01_015) = 050302010) व्यवस्था (हर क्षेत्र मे प्रवेश तीर रखने वाली विशेष तूराहि)

सूक्ष्म–अति सूक्ष्म सरकार : शरीर के अंदर कि आंतरिक(01_015) = 050302010) व्यवस्था (हर क्षेत्र मे प्रवेश तीर रखने वाली विशेष तूराहि)

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  • November 25, 2025
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सूक्ष्म–अति सूक्ष्म सरकार : शरीर के अंदर कि आंतरिक(01_015) = 050302010) व्यवस्था (हर क्षेत्र मे प्रवेश तीर रखने वाली विशेष तूराहि)
• शरीर के बाहर दो सरकार :-> एक सरकार आधा कर और दुसरी आधा कर लेती है… 
• –> कर, नियम, व्यवस्था सुरक्षा के नाम पर पुलिस और उद्योग को लाइसेंस निर्गमन का रास्ता साफ़ करने का वादा करते चलती है…
• जिसके कारण अमीर और अधिक अमीर और ग़रीब के माध्यम में सहयोगी बन नामांकरण का पात्र नहीं बन पाता है…
• फ़िर भी सम्भोग की दवाई बनाने में सफ़ल हो जाता है…
• बाह्य सरकार कर देती नहीं ,सिर्फ सुरक्षाबीके नाम पर ग़रीब बनने कि योजना, सुविधा; दोनों मिलकर बाहरी व्यवस्था चलाती हैं…
• आंतरिक DÑA(a•z)विकृति का नाम छुपाकर शुन्य दोकर भुगतान करने वाले को एसो आराम के साथ टेंशन फ्री में अपलोड कर से ही 05में छटा बना दिया जाता है…
 
• शरीर के अंदर की मूल तुरही:->
• 01_015_050302010…
• बाहरी सरकार से भी सूक्ष्म, शक्तिशाली और सतत सक्रिय है अंतर्यात्रा की सरकार…  
• अधर आधार पर मनुष्य का विचार, व्यवहार, भाग्य और विकास तय अंधत्वत नमस्तस्ए होते आ रहा है…
• स्वयं का स्वयं केलिए स्वयं के उपर चलाया जाने वाला साम्राज्य केद्वारा आत्मा के पहले शुन्य शुन्य शून्य एक से भगवान मे मात्र 03 में से 02 और 01_08 का 010सहयोगी परमात्मा दिखाई देता है…
• 01 – मूल चेतना :– एक बिंदु, एक स्रोत, एक निर्णयकर्ता –> यही अस्तित्व की जड़ ऊर्जा है…
• 015 – पाँच तत्वों का समन्वय :– पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश – शरीर इनसे बना है और इन्हें अनुशासन देने वाला है शुन्य एक शून्य शंखभस्म नामांकरण शंकर है …
• 0503 – पाँच कर्मेंद्रियाँ + तीन गुण
– हाथ, पाँव, जिह्वा, जनन, उत्सर्जन – सत्व, रज, तम – यही क्रिया–प्रकृति की आंतरिक व्यवस्था है…
• 02010 – दो आँखें, शून्य विकार, एक मन, शून्य अहंकार :– देखने–समझने की क्षमता – मन का अनुशासन – अहं को शून्य कर ऊर्जा का विस्तार करने की क्षमताओं का विस्तार एवं ध्यान मुद्रा उ से मुल्य निवृत…
• प्रातःकाल अमृता बेला से वेला की स्थापना कर दिया नहीं फ़िर भी सम्भोग से समाधि सम्भव है...
• पुत्र का अलग संसार बना हुआ दिखाई देता है…
 
• विशेष गुणधारी दृष्टि (हर क्षेत्र में लागू)
• 01. प्रशासन (गवर्नेंस):– बाहर की सरकार निर्णय लागू करती है, – भीतर कि (01_015) सरकार परिणाम उत्पन्न करती है। असली शासन भीतर है…
• 02. उद्योग–व्यापार :– बाहर लाभ–हानि, अंदर निर्णय–बुद्धि…  
• – (05_03) सरकार सही कर्म, समय और दिशा चुनाती है…
• 03. शिक्षा–ज्ञान :– बाहरी स्कूल जानकारी देते हैं,…
• – अंदर की (02_010) सरकार अनुभूति–बुद्धि जगाती है…
• 04. स्वास्थ्य–उपचार :– बाहर दवा, – अंदर मूल उपचारदाता — पाँच तत्वों का संतुलन (015)= ५१५= 05150 एंड सो ऑन…
• 05. अध्यात्म–धर्म :– बाहर उपासना, – भीतर 01 स्रोत से जुड़ना। – यही परम शक्ति का असली दरबार…
 
• सार :- बाहरी दोसरकार व्यवस्था देती है…  
• भीतरी सरकार जीवन अनन्त दिशा 01देती है…
• जो व्यक्ति अपनी 01_015_050302010 आंतरिक सरकार को पहचानता है, वह जीवन के हर क्षेत्र मे :— विशेष, अद्वितीय, सूक्ष्म और प्रभावशाली बनते चलता सदुपयोग प्रदान प्रधान मुखिया 01-010 ग्रन्थ कि गारंटी देता है…

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