हम कौन हैं, क्यों हैं और किसके लिए हैं.…

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  • November 30, -0001
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हम कौन हैं, क्यों हैं और किसके लिए हैं.…
* हम सब क्या हैं—यह प्रश्न केवल जिज्ञासा नहीं, बल्कि आत्मा की पहली दस्तक है…
* हम किसके लिए हैं—यह उत्तरदायित्व का बोध मन भार सौन्दर्य केलिए है…
* हम क्यों हैं—यह सृष्टि के उद्देश्य से साक्षात्कार है…
* हम लक्ष्य का परिणाम हैं :•:
* मनुष्य स्वयं में कोई संयोग नहीं, बल्कि किसी लक्ष्यधारी का परिणाम फ़ल है…
* माता–पिता के अचेतन में, कभी समाज की आवश्यकता में, तो कभी प्रकृति की योजना में—हम जन्म अनेक रूपरंग नाम 01एक समान लेते हैं…
* किसी के लिए हम आकांक्षा हैं, किसी के लिए उत्तरदायित्व, और किसी के लिए समाधान…
* मेरा अपना जीवन स्वयं ख़ुद उदाहरण है—
* अचानक, अंधकार में जन्म; (०९)आंखें खुलीं, तो अध्ययन बन साधना उमर 08बरस 05माह 010 दिन माह जुलाई 01966…(आठ वर्ष, पाँच माह, दस दिन - छियासठ वर्ष, पाँच माह, दस दिन पढ़ना लिखना सीखना जीवन धरम करम धाम विश्राम हराम खीरपूड़ी एक अन्नदाना फ़सल समान वातावरण निर्माण कार्य है...
* कर चोर और लतखोर साहुकार बन हुकुम चलाए छोटी बड़ी उपलब्धि ख़ुद ले देकर उद्योग संचालक विभागाध्यक्ष कहलाए दाऊ राम बलराम है…
* 002जुलाई 02023 फ़ि|फिर एक दिन, स्वयम ॐ नींद से नहीं—निंद्राशन से जागृत हुइ आशा कि (09) नौ किरण यूनिवर्स ऊर्जा 001 से 010 मिनट लक्ष्य ट्रेडमार्क अनुरोध पेंडिंग है…
* ओम मन क्या है…?
* मै हम सब मन भावन यूनिवर्स ऊर्जा जागृत हैं…
* पर किसका मन…? — (रजकण)
* किसके लिए...? —
* कमल पुष्प निर्मल मन कोई हल्काफुल्का तत्व नहीं… (०१७)सत्रह टन पवन भार—धरती नाभि अधर आधार 001पल महान मन है…
* धरती—मन, दिल, धन, संपत्ति—सबका भार नाभि वहन/सहती करती भ्रम नही ब्रह्मकमल घर उग आया फल बिज़ एक बार दर्शन फुलमाह बारंबार शुन्य गमला ब्रह्म कुमारी प्रजापति विश्व विद्यालय स्थापित द्वार खुलवा देता राज योग नाम राज़ है…
* वास्तविक संपत्ति न भूमि है, न धन, वास्तविक संपत्ति बुद्धि ब्रह्मकमल पति पत्नि रजरण बेटा एक बलवान पहलवान नही हक़ीक़त है…
* (•••३)तीन बिंदु: असली पूंजी अचल संपत्ति तीन बिंदुओं में सिमटी देह देश भक्त लीडर आत्मज्ञानी बुद्धि समय है…
* समय संस्कार स्वस्थ शरीर उद्योग क्षण एक हरपल चले कम्पन कोई बीमार अवस्था भान है…
* (०१)शून्य एक पल में खुलता, भाग्य द्वार LUCK कोई संयोग नही, सजग समय–बुद्धि परिणाम फ़ल पिण्ड है…
* शरीर :•: शुन्यएक साथ चलता–फिरता उद्योग बीजकण प्रिय रसमलाई है…
* मानव केवल देह नहीं—एक संपूर्ण सफ़ल उद्योग कण क्षण भंगूर शब्द बाण तीर्थ है…
* (016) शुन्य सोलह अंग द्वार और यंत्र का संयोजन अकरमशील स्थिति अकर्म मरण समान 01शून्यएक है…
* जो ऊर्जा उत्सर्जन कर उपयोग करे परिणाम स्वमेव सिद्ध कल्पना मन और स्वास का खेल ध्यान खेले मन राज कर दाता, बाक़ी तिरस्कार अधिकारी प्रमुख नाम धारी पहलवान है…
* संस्कार से शुरू होकर गृह प्रवेश पति–पत्नी सपरिवार, परिवार कृषक चेतना और भूमि अन्न पोषण कर औरत कर भुगतान करे पुत्र पुत्रि रत्न वरदान है…
* समाज विस्तार, डिग्रियाँ कागज़ पर हैं, मन सिंहासन उपभोक्ता समाधान–करे वही उत्पादन, प्रकृति और मानव बीच संतुलन समझ सहज कर - मन इनकम में “ण” ऋण बोझ नही हक़ीक़त कर में “र” ब्रह्म ज्ञान बारह बरस अंक अंग आंख है…
* बंधन रस्सी नही कर मन इमानदार कोई नही, समय स्वयं रास्ता प्रकृति प्रेम साथ लेन देन कोई बात नही है…
* मै समय मेरे लिए काम कर गया—वही समय आज आपका मै है…
* बी|बिज़ सिद्धान्त आप स्वयं आज 018+ बरस पेड़ बन इनकम खाए, काम करते देखना इनकम टैक्स के बी|बिज़ खाओ खिलाओ संग्रह संघर्ष, कर नही, सिर्फ़ समझ वरदान परसाद वितरण शुन्य शून्य एक ज़मीन केन्द्र शरीर संतुलन सिध्दांत उलटा सीधा "T" टी सन्तुलन जड़ वृक्ष,और फल बिज़ प्राप्ति आसान है…
* धरती पर अवसर असीमित अनन्त मानव महान इन्सान है …
* शुन्य के माध्यम अन्दर बाहर शून्यएक शून्य एक का अभाव मे स्वभाव संस्था आकार हैं…
* शरीर उद्योग पृथिवी पर सबसे बड़ा सर्व केलिए सर्व के पास_फ़ैल कोइ नही है …
* सिर्फ़ उपलब्ध संसाधन आंख कान नाक मुख हाथ पाव सर्वश्रेष्ठ ऊर्जावान फैक्टरी सहायक कर्मचारी अधिकारी प्रमुख नाम राज़ सिस्टम इको वातावरण अनुकुल है…
* सरकार और अध्यात्म औशधि जग़त राजनीति मन्दिर मस्जिद गिरजाघर प्रेयर पवित्र कब्रस्थान यादगार पल है…
* (03)शुन्य तीन स्तंभ शरीर – कर्म और उत्पादन आवश्यकता मॉडल GMP eGST GOD सिद्धान्त प्रोडक्ट्स अनुकूल बी|बिज़ - प्लेट प्लांट रूट रूफ लगातार पढ़ाई रस कर पहचान है…
* सरकार – व्यवस्था और संतुलन :•: भागीदार है…
* अध्यात्म – दिशा और अर्थ पर्यायवाची शब्द गायन गीत मीत जी नमस्कार प्रणाम प्रणय क्रिया आलिंगन द्वार खुलवा देना आंतरिक सरकार असंतुष्ट युवा नेता अभिनेता अभिकर्ता उद्योगपति अध्यात्मिक ज्ञान विज्ञान अध्यात्म औषधि प्रसाद वितरण शुन्य ऋषि रोशनी शेरनी समान है…
* अश्व गज शेर तीनों एक हो जाते हैं, तब मनुष्य केवल जीव नहीं रहता—वह समाधान बन दौड़ दिन रात 01शुन्य एक ग्यारह बजे किलो मीटर बर्फ़ पानी समान घनमीटर है...

निष्कर्ष :•:
* हम सब माता पिता अध्यात्म औशधि आंतरिक जगत कि राजनीतिक लक्षण और परिणाम है…

* अंततः—हम स्वयं लक्ष्य बनते है, मानव जीवन की सबसे बड़ी स्वतंत्रता आजादी है…

* इनकम खाये इनकम पेड़ प्रकृति देता है …
* शरीर उद्योग प्रकृति इनकम कोई नोट नही, इनकम एक बी|बिज़ प्राण है…

* इनकम केवल खर्च होती भूख मिटाती है…
* इन्वेस्टमेट्स बनती इनकम एलिमेंट्स के रूप ००१५ तत्व मे विभक्त हो पचती है…

* अर्थात् सही समय, सही स्थान, सही संस्कार प्रसाद दाना ग्रहण कर लेन देन फ़िर लौटादेना है…
* प्राकृतिक प्रेम सिद्धांत प्राण निर्माण मन और दिल 010बिन्दु करता कर्ता है…

* शरीर, बुद्धि दोनो विद्वान संस्कारवान, किन्तु कर्ण श्रम_भ्रम सुनकर भीतर कन्फ्यूजन उन्मूलन करता या उलझा कर भटका भुगतान पाता है…

* समाधान कर्ता इनकम पैड पेड़ रियल्टी रॉयल्टी है…

* भटकाव भ्रम गुलामी स्वीकार्य करता कर्ता ख़ुद कृषक मॉडल नही है …
* राजनीतिक अध्यात्म औषधि प्रसाद उद्योग हथियार आज भी अघोषित चिन्ह कोष्ठक ट्रेड मार्क और चुनाव प्रक्रिया है…

* इनकम खाने पचाने का अर्थ —सीखना, सहेजना, साधना प्रैक्टिकल अनुभव विस्तार प्रो- शुमर मुखिया मण्डल मॉडल GMP है…

* बीज, बिज़ तुरंत फल खाए वह नष्ट करता है, पर बिज़ प्रो- सुमर बीज मिट्टी, जल, धूप और धैर्य मिले तो वह वृक्ष रॉयल्टी तना छलांग शाखा 01 एक समान है…

* वृक्ष ब्रश अनगिनत शाखा पत्ती फलों की समानांतर व्यवस्था बिज़ संग्रहण मुख वंशावली वरदान है…

* व्यक्ति अपनी इनकम केवल भोग नहीं, बीज कण बिज़ समझे, वह मजदूर निर्माता, वोटर शासक प्रधान सेवक महान इन्सान है…

* उपभोक्ता प्रो–सुमर है, इनकम का पेड़ एक दिन उगता पर दिखाई बुआई का दिन सक्रिय नही सिर्फ़ अनिवार्य रोज़गार एकदिन दिल्ली घर द्वार खुला है…

* एक दिन बिना रोपे कभी नहीं उगए फ़िर दिखाई भी नहीं देता है…

* इसलिए— इनकम खाइए, बीज पचाए तीन_तिन किलो पानी प्रकाश किरण यूनिवर्स ऊर्जा जागृत पाए, धैर्य रख —पेड़ तना स्वयं पैर पसारे खड़ा है…
* अन्दर लाल बाहर चौड़ाई लाल दिखाई देता/ देती कुमार/री दोनो एक समान बारंबार शुन्य एक समान वातावरण निर्माण है...
* प्रयास अमर जिवन सम्भोग समाधान पूरण जिवन विस्तार है…

* मन मर्जी फ़सल धन धन्यवाद पत्नि सामाजिक बन्धन नही अध्ययन विषय हि चाबी सफ़लता नाम स्वर सर्जरी केन्द्र संतुलन सिध्दांत है…

* सामान्य ज्ञान विज्ञान इनकम प्राकृतिक सिद्धान्त प्रेम ब्रह्मचर्य 004 शुन्य चार पाव धरा सम्भोग अडा सन्तुलन रजकण बहार है…

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