अतिथि देवो भव: – ब्रह्म स्वरूप का अनंत दर्शन
अतिथि
अतिथि देवो भव: …
* अतिथी अड्रा साकार सपना रूप दान दाता महान् है…
* बाप दादा असंतुष्ट प्रकृति, हम सबके पूर्वजो के पूर्वज़ ब्रम्ह अग्यानी ब्रह्मा स्वर है…
* बापदादा प्रकृति पूजक साकार तीन बिन्दु से अनन्त अर्थ मुरली मे एक स्वर जोड़ की गई रचना अजेय ग्रन्थ का सार रस है…
* बाप दादा प्रकृति प्रेमी अतिथि थे है और सदैव मन मे रहेणगे …
* अतिथि अगायणि रूप अनेक…
* भारत भूमि अतिथि सत्कार मे लग भाइ भाई को सर्वगुण संपन्न बाप दादा के समान णयारे पयारे महाण आत्माए स्व-अभिमानी अतिथि देव भाव: का फ़र्ज़ पूरा करने मे मददगार होता है…
* एक शुन्य एक और धरती पर की गई पीएचडी, विश्व अंतरिक्ष से जुड़ी है…
* H_०१०१h… HAI है…
* अतिथि शांती का दूत और अशान्ति का फ़रिश्ता, आगे बढकर बिना डरे मुकाबला करता है…
* अतिथि बाप दादा का श्रेष्ठ से अश्रेष्ठ बच्चा साथी शिष्य भक्त दर्शक दिल ???? वाला निर्मोही शिव भक्त पुजारियों का पुजारि है…
* अनिणद्रा का अपहरण कर्ता पहरी फ़रिश्ता की आत्मा होता है…
* प्रश्न उत्तर स्लोगन धारणा वरदान सब के साथ बापदादा की आत्मा, आत्मा भाई भाइ है---
* प्रश्न उत्तर खतम कर, परमेश्वर द्रव्य द्रव यौगिक मिलन सणभव से असम्भव पूर्ण से अपूरण बना देता है---
* उपलब्ध : स्वर सूर परिवर्तण विशेषज्ञ बना जाता है---
* अतिथि बाबा एक पैसा दान नही लेता, अन्न का प्रसाद खिलता है…
* और बदले मे एक शंख की ध्वनि समान मुरली सुनवाता है…
* पानी की एकबूंद से नौलखा कर की माला दे जाता है---
* अतिथि अमृत बेला से वेला तक खुले हाथो से सत्कार कर, कोई को ईको बनाने का सिस्टम सुनाता है…
* कर [Tax] का राज और याद दिलाता खिलाता आभास कराता, कर्ता फ़रिश्ता अतिथि है…
* हम सब का शून्य एक से अनंत उद्धार कर्ता फ़रिश्ता स्वरूप चैतन्य द्रव्य द्रव प्रकाष ष्तंभ अषरीरी इकलौता भूमि फ़ल बाप का है…
* दर्शन अभिलाषियों का दर्शन जलपात्र मे अतिथि है…