सपना उद्देश्य बीज बिज़ है

सपना उद्देश्य बीज बिज़ है

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  • November 05, 2025
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 “सपना उद्देश्य बीज बिज़ है” ---

सपना उद्देश्य बीज बिज़ : जीवन का प्रारंभिक सूत्र कण कान है :→

* बीज ही सपना है…बिज़ (Business/बिज़नेस) उद्देश्य है,
और फल फ़ल परिणाम है…।
* बीज ; बिज़ जो बोया गया→ कल्पना_ विचार, करम, भावना_ संस्कार _संकल्प केसाथ—> वही आगे चलकर वृक्ष है…।---

परिणाम : फल फ़ल पत्ती शाखा फुल फ़िर फल रस बिज़ अमर →

* यह जीज़ीजिवन चक्रीय दर्शन है… —> बीज →बिज़ →पौधा → फूल → फल → रस → नया बीज → अमरता।
यानी हर फल के भीतर फिर से बीज होता है — सृजन की अनवरत धारा बहती दिखाई नही देती है---।

•→> "फल मे बीज और बीज मे फिर फल छिपा है ↑→ यही अमरता का रहस्य है…।"---

* राजनीति : 00पंच → पार्षद → विधायक → सांसद010_00…

* यह बीज बिज़ से वृक्ष बनने की राजनीतिक यात्रा है → ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्र स्तर तक का विकास क्रम→।> बीज = जनता का 01मत विश्वास…
* पौधा = पंचायत
* फूल = विधायक
* फल = सांसद
* रस = नीतिया जो देश को पोषण दे… ।---

* उद्योगपति : क्षेत्र (0_- 01|02||010) कच्चा पक्का फल बीज उपभोक्ता…०९|09_०१०|010

* यह उद्योग और उत्पादन का जीवन चक्र है→|> कच्चा माल → प्रसंस्करण → तैयार उत्पाद → उपभोक्ता → पुनः बीज निवेश>।बच्चा कच्चा पक्का…
* यह दर्शाता है कि उद्योग भी एक जीवित बीज बिज़ है — जो उगता उपजता, बढ़ता, और पुनः बोया जाता है…।→
* संकेत 0_010 — "शून्य से एक" — का अर्थ है सृजन की प्रक्रिया :
शून्य से आरंभ कर एक पूर्ण प्रणाली बनाना…।---

* अध्यात्म : मन|अंतर्मन वार्तालाप लड़का लड़की प्रेम मस्ती आलिंगन सद्व्यवहार संस्कार →दर्शक → भक्त → शिष्य → गुरु → अमर अविनाशी अदृश्य महान…

* यह आत्मा की साधना परिवर्तन विशेषज्ञ सारथि लक्षय वर्णन अनन्त जीवाण परमाणु ऊर्जा विकिरण यात्रा है…03 मुख वंशावली शरीरधारी काफ़ी पिए पिलाए…। > देखने वाला 018 (दर्शक) → भक्ति करने वाला 020(भक्त) → सीखने वाला (शिष्य)018 → सिखाने वाला (गुरु)018_0120 → स्वयम को जाने अमर010… 05तत्व…।> यहाँ भोग, प्रसाद, संस्कार, अमृत जल → आत्मा के पोषण के साधन है…योग भट्टी ध्यान शक्ति धारण परम संतुष्टि…अ००००_ ज्ञान …०१०…।
* शून्यएक जीवन जिवन से हि (Living Life) है → केवल जीना नही, जीवन का अनुभव खाना पिना सोना विश्वास फ़िर हक़ीक़त मे देखना दिखाना दृष्टा मेहनत कस भगवान का शिव शक्ति धारण कर देवताओं कि मंडलि तैयार करना है…।---

* समाज : लड़का <–> लड़की|कि
* सृष्टि जनम चक्र और संतुलन का बीज बिज़ बुआई "कर" फल देवता है…।> लड़का (ऊर्जा) + लड़की (सृजन पात्र उम्मीदवार धरती पुत्र श्रवण पुत्री रवि शक्ति) => परिवार, समाज, संस्कृति का निर्माण करता कर्ता…।>मानवता के बीज उत्पन्न है…।---

*शिक्षा : ००|00_१०|०१० ; अA_अ:|A _UOM: ; कB_श्रZ

* यह ज्ञान बीज का सांकेतिक सूत्र है —> संख्या और अक्षर दोनो मिलकर चेतना के स्तर है…।

* कोड अर्थ व्याख्या…

* ०० अज्ञान बीज अवस्था…
* 00_010 जागृति अंकुरण…
* ०१० ज्ञान फल फ़ल चयन विकास…
* अA_अ: ध्वनि मे मधुर वाणी संस्कार निर्माण प्रैक्टिकल ट्रेनिंग 0सेंटर अनेक है…
* UOM Universal Om सृष्टि का मूल बिज़ विर्य आधार धरती शरीर उद्योग स्पंदन कर दिया लिया खाया पिया सोया फ़साया माया जाल मे फंसना फ़साना है… और बोले क्या चाहिए एक से सौ फ़िर हक़ीक़त बोले तेरे जैसे अनेक सुक्ष्म ऊर्जा कण दानवीर सूर्य पुत्र पुत्री कोइ श्रवण पुत्री ऊर्जावान सुप्रीम चुपचाप 09सौ करोड़ शक्तिशाली है पर निर्भर …0१101१01101१01१…
* कB_श्रZ करमन से श्रवण शिक्षा से पी एच डी संस्कार लड़का H सीढ़ी है लड़की आदि शक्ति धारण रूप अनेक प्रकाश किरण ऊर्जा विकिरण 07 बीटा अल्फा गामा; गाना गए बन गए साहूकार सुने सुनाए अनेकोबार सब बाकि बेकार विधवा पेंशन भोगी इंजीनियर जेल भोगी अभोगी अन्न दान सभी कर मुक्त सुविधा पाए सैलरी भत्ता कर फ्री रहन सहन प्रजनन क्रिया प्रतिक्रिया शून्य शुन्य एक नहि आहे भरे अनेक … जीवन्त अनेक मे एक बाकी सभी हक़ीक़त मे शोषण कर रहे मुखिया हस्ताक्षर कर्ता फ़रिश्ता ॐ या किसी अन्य कि-की दासी दासू कहलाए अंत गति शक्ति बुद्धि संस्कार में पुनः शूणय शुणय विलीन हो अमर अविनाशी अदृश्य प्रवेष तक जिवन है दाता शून्य एक धरती नियम बीज बिज़ बुआई वीर्य चक्र… 09_010…---

* आकाश : ००००१ = समय (00001 Time)

* समय ही वह अदृश्य आकाश बीज है ←↑→ जो हर चीज़ बीज बिज़ को अणकुरण और अमरता कीकि दिशा है…।→↑↓:> समय = परम पिता जी कि श्वास हे…। 00समय की लय मे ही सृष्टि का स्पंदन और परिवर्तन निहित है…।---

पाताल : ::•::
* यह मूल बीज केन्द्र बिज़ स्थान पृथ्वी है —> जहाँ सबका आरंभ प्रारम्भ और पुनः अ प्रवेश द्वार भूर से वीर्यरक्षण बुर मे से तन मे तन बना है…।
यह संकेत है —>> "बीज बिज़ मे मिट्टी मे दबा और फ़िर बिज़ पर अमर बना है…01एक शंखभस्म है…।"---

विस्तृत निष्कर्ष:→> "समय अधर आधारित व्यवस्था परिवर्तन" → यही प्रकृति का धरम करम स्वर व्यंजन माता पिता श्री है…।
* माता–पिता, भाई–बहन, रिश्तेदार, संगी–साथी — ये सब जीवन वृक्ष की शाखाए सूर्य है…। हर पल “फलफ़ल पलपल” पीपल वृक्ष→ जीवन के सतत प्रवाह का ऑक्सीजन उत्सर्ग करता प्रतीक, निजी जिवन है …।

* "०३" = तीसरा तत्व — बीज_बिज़, जल_हाइड्रोजन+1|01*ऑक्सीजन -2|- 02, और प्रकाश किरण न्यूट्रल ±00—→ जो सृजन का त्रिकोण स्वयम बन_बनाता है ; बाद मे विष्णु नामधारी जी नमस्कार करते हुए कर्ता माता पिता भाई बहन रिश्तेदार संगी साथी है।---

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