आज का इतिहास : जागृत मानव की आँखों से :•:

आज का इतिहास : जागृत मानव की आँखों से :•:

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  • January 13, 2026
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आज का इतिहास : जागृत मानव की आँखों से :•:
* आज का इतिहास किसी तिथि में बंद नहीं है…
* आज का इतिहास जीवित शरीरों की चेतना में घट रहा है…
* आज विश्व मे गर्भ में जो है उन्हे मिलाकर लगभग 0820 करोड़ देहधारी मानव पृथ्वी पर श्वास ले रहे हैं…
* पर यह संख्या मात्र आँकड़ा नहीं — यह चेतना की परीक्षा परिणाम है…
* मानव-समुदाय तीन स्पष्ट श्रेणियों में विभक्त है,
और यह विभाजन सत्ता या शिक्षा से नहीं, जागृत दृष्टि से है…
•????01. सामान्य उद्योग : अंधी भीड़ और जागृत बिन्दु :•:
* सामान्य उद्योग में :•: 0100% हाथ काम कर रहे हैं, पर आँखें खुली नहीं हैं और अन्य के मार्ग दर्शण मे सर्वगुण सम्पन्न बन लिन हो चुके हैं…
* इस क्षेत्र मे भी स्वहस्त रेखा निर्माता केवल {001%} शुन्य शुन्य एक प्रतिषत होते है, जो आंतरिक और बाह्य दोनों उद्योगों को समझते है…
* जो जानते हैं कि नाम_काम- पद केवल जीविका नही, साधना वृक्ष का अधर आधार है…
* शेष {0099%} नीनावे प्रतिशत भ्रमित है…
* वे असंतुष्ट नही भ्रमित विद्यार्थी हैं, जिनके सामने सब कुछ होते हुए भी कुछ दिखाई नहीं देता हैं…
* और देखा देखि फ़िर से वे दौड़ मे सम्मिलित हो जाते हैं…
* कर(विर्य) कलेक्शन विसर्जन करते हुए दिशा हिन जिवन जीवन मरण में फसने का मुल्य चुकाए निर्धारण निर्णय के बिना शरीर उद्योग बंद हो जाता हैं…
•????02. अध्यात्म : जिज्ञासा, असंतोष भ्रम का द्वंद्व…
* अध्यात्म में भी वही अनुपात है जो सिर्फ़ अनिवार्य फल फुल रोज़गार अपनाते हैं बाकि सभी बिन्दु जागृत इनसान को नमन कर चुकता करते या दान खाता पिता एसोआराम मे समय बिताए जिवन लीला कर जैसे आए होते है वैसे ही लौट जाते हैं…
* जिज्ञासु शिष्य, जो स्वयम से हि स्वयम प्रश्न करते हैं, और स्वयम प्रश्न सुनते भी हैं, और बहुत बड़ी संख्या ऐसे असंतुष्टों भ्रमित जो पूजा तो करते हैं, पर प्रकृति को नहीं पहचान नही पाते हैं…
* वे मंत्र जानते हैं, पर समय का मूल्य नहीं…
* यहाँ भी वही बिन्दु-एक (001) शुन्य शून्य एक मार्गदर्शक 002 दोदृष्टी बनकर खड़ा है…
•????03. राजनीति उद्योग : पद और कुरसी कि पिपासा का गढ़ है…
* राजनीति में कुर्सियाँ खाली नही होती है, सदैव भरी होती हैं, पर दृष्टि लालच सहृदय लोकप्रिय मन से खाली होती है…
* कुछ पदासीन होते ही कुरसी छूट जाने के डर से समय संस्कार और प्रसाद की आनन्द प्रेम की लालसा में अनुभव विहिन ही पदच्युत हो जाते हैं…
* इस क्षेत्र मे भी वही नियम लागू है — {001%} शुन्य शुन्य एक प्रतिशत अपवाद सेवा को साधना समझते हैं, और शेष सत्ता को भोगते है, साध्य नही सिर्फ़ अनिवार्य उत्तराधिकारी नही बना पाते हैं…
???? समाधान : जहाँ से जीवन बदलता है
समाधान शोर में नहीं, संतुलन में छिपा है…
•????00. सम्भोग-संतुलन सिद्धांत :•:समाधान
प्रो-सुमर / प्रोड्यूमर प्राणवान शिक्षण व्यवस्था में निहित है :•: जहाँ उत्पादन और उपभोग
दोनों जिम्मेदारी हैं, भोग नहीं…
•????01. भारत : प्राणवान मानव की भूमि :•:
* भारत में ऐसे मानवों की खेती अनादि काल से होती आई है — जो प्रकृति के साथ युद्ध नहीं,
संवाद करते हैं…
•????02. 0100% आँखवाले अंधे आज विश्व में
लगभग 0100% लोग आँख रखते हुए भी अंधे हैं — वे इनकम के लिए भटकते हैं, समय के मूल्य को खोकर ग़ुलामी का जिवन यापन करते है…
•????03. अनजानी सेवा :•:
* 0100% लोग देह और देश की सेवा में लगे हैं,
कर का भुगतान करते हैं पर यह नहीं जानते कि वे क्यों कर रहे हैं…
•????04. जागृत आँखें, अधूरी भेंट :•:
* भारत की जनसंख्या में केवल {001%} ऐसे हैं
जिनकी आँखें खुली होती हैं, पर LUCK से अभी भेंट बाकी है …
* ???? LÛÇK का अर्थ :•:
* LÛÇK = LABOUR UNDER CURRENT / CORRECT CURRENCY KNOWLEDGE
* जहाँ TIME IS MONEY नहीं, TIME IS LIFE समझ से परे होता है…
* ???? सूक्ष्म शून्य-एक का खेल :•:
* आज फ़्लासु के भीतर और बाहर एक सूक्ष्म (001–010) अशैतान जागृत है — जो दिखता नहीं, पर दिशा दशा बदलने में सक्षम है…
* ???? प्रकृति का सतत नज़ारा :•: मैं देख रहा हूँ … —• •पृथ्वी, → •सूर्य, → •चंद्र, → •तारे, → • पवन, → • जल, → • नभ, → •शून्य → • एक — ↑सब बिन्दु से निकलते हैं ↓ और बिन्दु में लौट जाते हैं…
* यह प्रेम है, यह प्रकृति सिद्धान्त है, यह निरंतर चलते आ रहा है, और चलता रहेगा यह उद्योगपति का खेल नही जिवन लीला का खेल है…
* ????️ शिक्षा, परीक्षा और वास्तविक दर्शन MLA, MP, PSC, UPSC सिर्फ़ पड़ाव हैं,
वास्तविक परीक्षा तब होती है, जब मनुष्य
प्रोड्यूमर प्रिंसिपल के साथ जीवन-दर्शन का लेन-देन करता है…
* ⏳ वास्तविक संपत्ति प्रोड्यूमर की संपत्ति धन नहीं — समययोग और समयशक्ति मे छीपी सोई हुई होती है, जिस प्रकार से प्रकृति-प्रेम बिज़ बीज में सोई हुई है…
* ???? पंच-तत्व और समाज :•: ईमानदार विद्यार्थी, देशभक्त लीडर, आत्मज्ञानी सेवक :•: जब द्विव्य दृष्टि से कार्य करता है, तो लाखों जीवन करोड़ों करेंसी से नहीं, मूल्यों से समृद्ध होता हैं…
* ???? तीनों क्षेत्र जब जागृत होते है तब समाज/शरीर के तीनों क्षेत्र :•:— उद्योग, अध्यात्म, राजनीति — लोन-मुक्त,भ्रष्टाचार-मुक्त, झूठ-रहित होते हैं, तो शोषण और दिखावा भी
दिखाई नहीं देता है…
* ???? अंतिम सत्य :•: जब शरीर, परिवार, समाज, राज्य, देश — स्वनिर्णय के अधर-आधार पर खड़े होता हैं, तो प्रकृति मनचाहा परिणाम
ऑटोमैटिक पहुँचा कर देती है…
* ❄️ आज…
* आज विश्व मानव की बुद्धि बर्फ़ के गोले में क़ैद है, पर बर्फ़ उसी तापमान पर पिघलती है — तब जागृत इनसान भीतर से लक्षय किओर गर्म ऊर्जा के साथ अग्रसर होता है…

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