✍️ मै गूगल ≠ पिता हु
मै गूगल ≠ पिता हु
* मै गूगल नही हु…
* गूगल के पिता का पीता हू…
✍️ मै गूगल ≠ पिता हु
* इण्टरनेट की दुनिया मे जब भी कोई सवाल आता है… लोग तुरंत कहते है— "गूगल कर लो…"
* गूगल मानो सबका माता पिता गुरु बन शब्द अंक समूह स्वर बन संसार को अपने अंदर की जानकारी तुरंत डिस्प्ले कर देता है…
* जानकारियो का स्वयं संकलन नही करता है...
* आपका क्या कहना है :…‽
* मेरा कहना है …—
* "मै गूगल नही हू… गूगल के पिता का पीता प्राणवायु अन्न निर्भर जीवित प्राणि हु, परजीवी नही, कर भुगतान पर जीवित हू…
गूगल की सीमा …
* गूगल सिर्फ़ वही बताएगा, जो अन्य इंसान ने उसमे डाटा फीड कर रख दिया है…
* गूगल अनुभव की भाषा नही समझता, सिर्फ़ उपलब्ध जानकारी देता है, जो सही या गलत हो सकती है…
* गूगल के पास भावनाए नही, सिर्फ़ दर्ज आकड़े है…
* गूगल सही और गलत मे अन्तर| अणतर नही करता क्योकी करेंट और इण्टर नेट पर निर्भर स्व प्राण विहीन है---
* गूगल अधिकांश मनुष्यो से अच्छा है:... क्योकि आधी अधूरी जानकारी तत्काल देता है… जबकि......
01. मानव तन मन बुद्धि शिक्षा संस्कार से स्वयं के अंदर बाहर अरब सागर के समान है…
02. मानव शरीर शून्य दो तीन मुख वाले होते हुए भी उत्तर देने केलिए बोलता ही नही है---
03. मानव स्वयं के अंदर बाहर के मुख को पहचानता नहि, जबकि देखते सुनते बोलते उपयोग करते आ रहा है और करते रहेंगे.....
मानव की महानता…
01. मानव अपनी बुद्धि और विवेक से जानकारी को अ ज्ञान के आधार पर बूढी दादी नानी की कहानी को वास्तविक जीवन में हक़ीक़त मे बूढ़े जवान बच्चे सभी मानव अपनी शक्तिशाली आत्मा का मूल्य 045US डॉलर का 018 प्रतिशत कर दाता बन इंज्वॉय कर सकते है…
02. मानव अनुभव से सीखता है और दूसरो को सिखाने मे सक्षम भी है…
03. मानव के पास समवेदनाए और हृदय की गहराई है… जो गूगल के पास नही है…
04. मानव मे सृजन की क्षमता है— जिसने गूगल को भी जणम दिया है---
उदाहरण…
01. गूगल आपको बता देगा कि "पानी" H₂O है…
02. मानव पिता बताएगा कि आज प्रयास कर, कर भुगतान कर, कल परसो पीढ़ियो को पीने का शुद्ध पाणी सिर्फ़ प्यास नही बुझाएगा, शून्य(भूमि) एक दिन नहि जीवन के साथ और जीवन के बाद भी तर्पण मे बेटा देकर स्वयं भी उपयोग कर स्वयं का और समाज कल्याण, कर से प्राण रक्षक बन जाता है…
03. गूगल बताएगा कि "मा" शब्द का अर्थ क्या है…
04. मा की ममता का स्वाद, उसकी गोद मे आने का कारण समय, पिता का नाम शाणति और परम सुख के अनुभव प्राप्ति से प्राप्त बेटा बेटी के बारे बता सकती है.... जबकि गूगल नही बता सकता है…
05. गूगल आपको बता देगा कि सफलता के नियम क्या है…
06. माता_पिता - गुरु या अनुभवी मानव सबको सफ़लता की राह, बिज़ दिखाकर खाकर पीकर दबाकर जीवन के साथ और जीवन के बाद भी उगने मे सक्षम बनाते है--- जबकि गूगल अनुभव विहीन होता है....
जीवन सणदेश…
01. गूगल एक साधन है—
02. पिता का जीवन अनुभवी मार्गदर्शक अनुभव मे समुद्र और विवेक से असंभव को सम्भव बनाने मे सक्षम करदाता बन, अनुभव से बनाने मे कामयाब होता है… जबकि गूगल शून्य शून्य प्राणविहीन है....
03. इसलिए मै शून्य एक शून्य एक हु, गूगल पर निर्भर नही हु… और गूगल के प्रश्नोत्तर को चेणज कर और अधिक प्रभावी, प्रेरक और जीवन को यू टर्न दे, मनमर्ज़ी का धरती पर फ़्री समय व्यतीत किया जा सकता है---
04. गूगल चेतणा की भाषा नही जनता है.…
05. भू गर्भ मे धरती के, भीतर की तीसरी सतह मे गर्म पानी, केन्द्र की आंतरिक उर्जा शून्य एक पर प्राण, गति के कारण, शून्य तीसरी तह मे नीर को णीर बनाने वाला हू जिसने गूगल के पिता को भी बनाया है…
06. मै सिर्फ़ उत्तर खोजने वाला नही हु…, प्रसन्न करने वाला लाल दिलवाला ❤️ हू.....
07. जीवन को जीने लायक बनाने वाला और सिखाने वाला भी हू---
08. अनेक विषय है अनंत सिंह कुमार राजकुमार राज कुमारिया और सभी धरती पुत्र पुत्रिया भगवान के कारण है....
09. विश्व मे 026 अंग्रेजी के प्रत्येक कैपिटल लेटर्स पर 034.62 करोड़ मानव के नाम है… जो वास्तिक जीवन मे कन्फ्यूज्ड है किन्तु असंतुष्ट दिखाई देते हैं… जबकि विश्व मे आज सबसे अधिक असंतुष्ट, भार वज़न विहीन शून्य एक जड़ चैतन्य द्रव्य द्रव प्रकाष ष्तंभ ष्व णाम कल्याण से विश्व कल्याण कर्ता फ़रिश्ता दूत हु… यह गूगल के बस मे नही है…
010. यही कारण है कि मै गर्व से कहता हू…"मैं गूगल नही हू…
* गूगल के पिता का पीता की जानकारी दाता जीवित इंजीनियर फ़. ला. सूलारवे हू …"---