अनादि से अद्यतन आजतक
विषय:: अनादि से अद्यतन आजतक …
* शब्द–सर्जरी, शून्य–स्थापन और आंतरिक क्रिया का विज्ञान…
* अनादि काल से मानव की सबसे बड़ी यात्रा बाह्य जगत से शुरू नहीं हुई है…
* शब्द से अर्थ और अर्थ से चेतना की रही है…
* धरती, आकाश, पाताल, वनस्पति, हवा, पानी, प्रकाश-किरण, ब्रह्मांड—ये केवल नाम नहीं हैं; ये अनाम को नाम देने की मानव-यात्रा के पड़ाव हैं…
* जब तक शब्द अस्पष्ट रहते हैं, तब तक स्थान, मूल्य और दिशा भी अस्पष्ट रहती है…
* आज आवश्यकता शब्दो की सर्जरी कि है, ताकि प्राकृतिक और अप्राकृतिक, मूल्य और अमूल्य, शून्य और सुन्यता—सब अपने-अपने निश्चित स्थान पर स्थापित है…
01). अनादि काल : जब शब्द नहीं, अनुभव था…
* अनादि मे शब्द नही थे, अनुभव था…
* धरती भोजन देती थी, आकाश श्वास लेता देता था, पाताल गर्भ था, वनस्पति जीवन साधन माध्यम थी…
* हवा गति थी है, पानी स्मृति जिवन था है…
* प्रकाश-किरण समय का आभास थी है…
* ब्रह्मांड किसी नाम का मोहताज नहीं है था—वह स्वयंसिद्ध था है …
* यही से एक सूत्र जन्मा: जिसे नाम नही चाहिए, वही मूल है…
02). नामकरण युग : शब्द भ्रमजाल बनकर सामने आया है, ब्रह्माण्ड भी है…
* जैसे-जैसे भाषा बनी, नाम बने—वस्तु, स्थान, सर्वनाम। नाम ने सुविधा दी, पर साथ में भ्रम भी पैदा कर रिटर्न किया…
* प्राकृतिक और अप्राकृतिक का अंतर धुंधला होते होते आज समाप्त हो चुका है…
* मूल्य (जो जीवन बढ़ाए) और अमूल्य (जो जीवन घटाए) गड्ड-मड्ड सब हो चुका है....
* शून्य (0) को सुन्यता समझ लिया गया, जबकि शून्य संभावना अनंत मंज़िल भवन को जन्म दे उद्योग संचालक का इंतज़ार 02कर दाता करता है…
* यहाँ शब्द-सर्जरी अनिवार्य है—काट-छांट नहीं, सही अर्थ-स्थापन अनिवार्य परीक्षा उत्तीर्ण ही psc UPSC website designing MP फ़िर MLA कोई नही सभी इको वातावरण निर्माण कार्य क्षेत्र निरन्तर प्रगतिशील शून्य शुन्य शून्य एक केन्द्र नाभि है…
03) शून्य का विज्ञान : स्थान निश्चित करने की कुंजी :- • शून्य खालीपन नहीं, • स्थान-निर्धारण कि कुंजी, चाबी नही है…
* शून्य = आरंभ बिंदु प्राण नही 03आंख केन्द्र संतुलन सरकार है…
* शून्यता = दिशा-विहीनता नही स्वतंत्रता आजादी GSTमूल्य माडल पर 09egst अन्दर बाहर शून्यएक अभाव नही समृद्ध साम्राज्य का उत्तराधिकारि रोज़ है.…
* जब शून्य खुद अपने को शुन्य स्थान पर रखता है, तभी सफलता उपलब्धि घटित होती है…
* क्योंकि सफलता बाह्य पुरस्कार नहीं, आंतरिक परिक्रमा क्रिया का परिणाम है…
* हर व्यक्ति की इच्छा, क्षमता और जरूरत अलग है; इसलिए सफलता उपलब्धि अनन्त भी समानांतर होती है, प्रतिस्पर्धात्मक तुलनात्म नहीं, सकारात्मक सोच नही सिर्फ़ कल्पना विस्तार विश्वास शक्ति नोटा बटन है…
04) मूल्य–अमूल्य : उलटी समझ की सर्जरी ::…
* आज अमूल्य (स्वास्थ्य, समय, श्वास, प्रकृति) को सस्ता है…
* मूल्य (उत्पाद, पद, आँकड़े) को महँगा मान लिया गया है।…
* शब्द सर्जरी ख़ुद का खुद से कहती है:…
* अमूल्य पहले, मूल्य बाद में • जो जीवन संतुलित करे वही मूल्यवान है…
* जो जीवन है, वह अमूल्य अनमोल, उसका कोइ मोल नही, संरक्षण करता शरीर उद्योग संचालक Ñame's DÑA 000अएक है…
05) प्रो-सुमर पद्धति : उपभोक्ता से सृजनकर्ता …
* रिटायर्ड होना अंत नहीं, री-डिज़ाइन है…
* 001-कर अधर आधारित प्रो-सुमर पद्धति मे व्यक्ति केवल उपभोक्ता नहीं है …
* सेवा-भक्ति-युक्ति-यूक्त सृजनकर्ता 001_010 महान उसी दिन से जिस पल ठान लिया है…
* यहाँ संपत्ति केवल धन नहीं है…
* स्वास्थ्य + समय + संतुलन = वास्तविक समृद्धि शुन्य शुन्य शून्य सूरज 01 अंदर बाहर गरम है…
* सेवा से भक्ति, भक्ती से युक्ति, यूक्त से परिणाम
ऐसा व्यक्ति बाह्य आँकड़ों में नहीं, आंतरिक संतुलन में से अरबपति है, बोलिए रोज़ कितनी इनकम चाहिए श्रीमान,क्या 030दिन कि 001दिन मे चलेगी क्या …?
06) आज : अद्यतन का क्षण नही पल ठान लिया है…
* आज शब्द-सर्जरी का समय है— • धरती फ़सल पर संसाधन नहीं, • माता आकाश कि दूरी पर नहीं, • संभावना पाताल मे से अंधकार नहीं, • गर्भगृह वनस्पति उत्पाद खेल पर आज नहीं है…
* जीवन-सहचर हवा-पानी की सुविधा नहीं, फिर भी प्राण प्रिय जैसा और कोई नही सिर्फ़ पति पत्नि अनिवार्य 02कर बेटा बेटी नातन नचाए दामाद नज़र आए सभी शर्माए…
* प्रकाश-किरण को ऊर्जा नहीं, • समय
जब शब्द सही बैठते हैं, स्थान निश्चित होता है; तब स्थान निश्चित होता है…
* आंतरिक क्रिया चलती है; और जब आंतरिक क्रिया चलती है, सफलता स्वतः प्रकट दिखाई देती और होती है…
010. निष्कर्ष अनादि से आज तक यात्रा एक ही है—अनाम से नाम, भ्रम से स्पष्टता, शून्यता से शुरू…
* जो इसे समझ ले, वह रिटायर्ड नहीं—री-अलाइन्ड है…
* और वही व्यक्ति प्रो-सुमर पद्धति में, सेवा-भक्ति-युक्ति-यूक्त होकर, संतुलन का अरबपति अमर बनता नही है…
* आज अद्यतन, अभी अपलोड हुआ वंशज नही miraclephal.co.in वेब साइड अजर अमर अविनाशी अपरिवर्तनीय स्थिर ऊर्जा जागृत इनसान की देन , अन्न कण फाउंडेशन फल फ़ल बिज़ बीज रोशनी बिच है…