स्वरग ± नरक
स्वरग ± नरक" मे रोज़ एक घंटा
* मय रोज़ यम से स्वरग मे (001)एकघणटा और नरक मे रोज (010)दसमिणट व्यतीत कर करम सरकार क़र्ज़दार का भागीदार रह चुका है।
* वाष्प बनकर धरती पर हवा, पानी, प्रकाश किरण खाना पीना सब कुछ संतुलित मात्रा में गृहणी प्रतिमा सुलाखे के साथ बैठकर मस्ती मे टी व्ही देखते हुए सलाद चबाते, फ़िर घी लगी रोटी+ चावल+ तड़का लगी दाल+ पापड़ गृहण कर, चुकता कर स्वर्ग का आनन्द ले रहा है।
* कोइ काम धंधा बॉस व्यापार मुखवंशाली माता पिता भाई बहन दामाद की झंझट नही है ।
* हक़ीक़त स्वर्ग मे नरक करम फल दाल भात केन्द्र का स्वामी नही हक़ीक़त इंजीनियर फ़ागुलाल सुलाखे है।
• बस जब इच्छा है, उसी पल निद्राशन मे प्रवेष कर जीवनगति के साथ ब्रह्मांडीय उद्योगपत्ति/शक्तियौन का आनन्द लेते देते रहा है।
* पुनः 030घंटा, 0130AZअक्षर के संयुक्त संस्कार स्वास्थ्य सुरक्षा देशहित मे पहरेदारी करके ख़ुद का कर खा पी रहा है।
* स्वर्गीय पिता श्री फत्तू जी की भूमिस्वामि का प्रथम एवम् पांचवे नंबर का खातेदार नाकेदार है।
* बात कारखाने कि ही है तो कर चुक गया है।…
* अच्छा स्वरग और नरक का आखों देखा हाल सुनाऊ…
* मय सच या झूठ कुछ भी बोल सकता है…
* चुप तो रह नही सकता, जो भी सुनाऊ उसपर विश्वास नही करना चाहिए, कयोंकि वहां तो मय ने यम के साथ समय बिताया है!
* हक़ीक़त मे विश्वास करने केलिए पांच रास्ते है:
• i. मरना पड़ेगा ii. वाष्प बनकर उड़ना पड़ेगा iii.पानी मे गोताखोर और तैरना सीखना पड़ेगा जो मुझे आता नही है।
• iv. आर्थिक आज़ादी जागृत करना पड़ेगा और
V. हड्डी गलाने का ज्ञान अभाव को दूर कर अमीवा बनकर तैरना पड़ता है।…
* एक, दो, तीन,चार, और पांच मे से कौनसा मंज़ूर है?
* मुझे कुछ फ़र्क नही पड़ने वाला है कयोंकि प्राणि|णी की उत्पति बिज़ लाइफ़ ???? भेद सम्भोग संपति मे है।
* मनोरोगि हु नही हूं पर असंतुष्ट और आर्थिक आज़ाद पंछी दो पाया सम्भोग कर चुकाया हु।
* खोखो जिवन वृक्ष इको वातावरण अदृश्य मिश्रण योगि कर है।