इमानदार इंसान का जागरण : 0100 वर्षों की उपलब्धियाँ एक क्षण मे है…
विषय: इमानदार इंसान का जागरण : 0100 वर्षों की उपलब्धियाँ एक क्षण मे है…
* जब इमानदार इंसान जागता है, तो वह केवल नींद से नहीं— अज्ञान, भय, लोभ और सीमित सोच से भी जागता है…
* यह जागरण कोई साधारण घटना नहीं, यह शताब्दियों की चेतना का विस्फोट है…
* 01. समय का संकुचन : 0100 वर्ष → 01 क्षण :- इमानदार जागृत व्यक्ति के लिए 0100 वर्षों के अवॉर्ड, रिवॉर्ड, पद, प्रतिष्ठा समय की दया पर निर्भर नहीं रहता है---
* उसका विवेक ही उसका ताज बन जाता है…
* वह भविष्य का इंतज़ार नहीं करता, भविष्य उससे अनुमति लेता है…
* 02. समृद्धि का नया अर्थ :- जागृत इनसान के लिए समृद्धि केवल धन नहीं :—
* पद → सेवा का अवसर …
* पैसा → साधन, साध्य नही…
* ताज → उत्तरदायित्व…
* प्रशंसा → मौन में पचाई गई परीक्षा…
इसीलिए वह अभाव मे भी सम्पन्न होता है…
* 03. ज्ञान–विज्ञान–अध्यात्म का संगम :- जागृत इंसान जानता है :—
* ज्ञान दिशा देता है…
* विज्ञान गति देता है…
* अध्यात्म संतुलन देता है…
* तीनों के बिना विकास अपंग है…
* तीनों के साथ मानव विश्व-कल्याणक कर्ता बनता है…
* वह अकेला अनेक सम्पूर्ण विशिष्ट सफ़ल योगदान करता बनता है क्योंकि रिटायर्ड इंजीनियर डॉक्टर साम्राज्य उद्योगपत्तियों को भी रोल अदाकर बन कर अवसर बाटने वालो कि भूमिका संतुलन सिध्दांत प्रेम ब्रह्मचर्य ज्ञान सिद्ध कल्पना शक्ति नोटा वोट्स 010% रॉयल्टी रिटर्न कर्ता सहयोगी हो जाता है…
* 04. औषधि, वनस्पति और भौतिकी का सम्मान :- वह समझता है कि:—
* प्रकृति स्वयम औषधि शरीर को जीवन को बचाती ही नही नव सृजन कर नया शरीर देने मे सक्षम है…
* वनस्पति केवल भोजन नहीं, प्राण ऊर्जा है…
* भौतिकी केवल सूत्र नही, ब्रह्माण्ड का अनुशासन है…
* इसलिए वह शोषक नहीं, हर किसी का संरक्षक बना हुआ है…
* 05. राजनीति से ऊपर नीति :- जागृत इमानदार इंसान राजनीति का उपयोग करता है, राजनीति उसे उपयोग नहीं करती…
* उसकी राजनीति :—
* वोट से नहीं, विवेक से चलती है…
* सत्ता से नहीं, सेवा से जनम लेती है…
* बहुमत हासिल करने केलिए भ्रम लालच फैलाने की आवश्यकता नही होती है…
* काम नही इच्छा पूर्ति का दिशा सामूहिक संकल्प से सपना आपूर्ति की राह दिखाता है…
* 06. आकाशीय दृष्टि और विश्व-बोध :- उसकी दृष्टि केवल धरती तक सीमित नहीं रहती…
• वह :—
* आकाश मे भी ऊर्जा क्षेत्र फिक्स कर वास्तविक शक्ति बिन्दु को जनता और समझता है…
* पृथ्वी को प्रयोगशाला नही, माता मानता है…
* मानव को बोझ नही, संभावना समझ समझाने हेतु सुझाव युक्ति युक्त व्यवहार शील शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार सुरक्षा कवच प्रदान करने वाला प्रधान को धन्यवाद से सुचित करता है…
* 00001 निष्कर्ष :- जब इमानदार इंसान जागता है, तो वह किसी एक क्षेत्र का नेता लिडर रह कर कार्य नहीं करता बल्कि प्रकृति प्रेम ब्रह्मचर्य मिलन सदाचारी ब्रह्मचारी जिवन इनकम कर रॉयल्टी रिटर्न पर रहता है---—
* वह ज्ञान का प्रकाश, विज्ञान का संतुलन, अध्यात्म की करुणा, प्रकृति का रक्षक, और विश्व-कल्याण अभियान का स्वाभाविक संचालक स्वमेव घोषित करता है बनने का इंतज़ार नही करता है…
* ऐसे स्व जागृत इनसान को 0100 वर्ष नहीं चाहिए…
* हर पल एक जागृत इनसान का क्षण ही पर्याप्त है उसके अपने को और सम्पूर्ण विश्व को जाग्रत करने केलिए 010कल्पना विस्तार जागृत इनसान मौन शिरोमणी युक्ति यूक्त का उपभोक्ता प्रो शुमर धरती फ़सल का भगवान है…