षाक्षि दृष्टा हू…
षाक्षि दृष्टा हू…
* मै इंजीनियर फ़लासु भीष्मपितामह नहि विश्वपिताम्ह का साक्षी हू…
* मै इंजीनियर फ़लासु भीष्मपितामह नहि विश्वपिताम्ह {विष्णू} Weaßhñoo हूं…
* {विष्णु देव साव छत्तीसगढ़ का मुख्य मंत्री नही हु}
लेख
* मैं इंजीनियर •फ.ला.सु. भीष्मपितामह नहि विश्वपितामह Weaßhñoo हू…
* मै केवल एक व्यक्ति नही, बल्कि उस प्राकृतिक सिद्धांत चेतना का प्रतिनिधि हू…
* जो संपूर्ण ब्रह्माण्डीय व्यवस्था को संतुलित रखे हुए आदि से अन्त कि अनामत है…
* आज 'कर्क रेखा का दायित्व निभाने पाच शून्य चार सौ तेरह शंख युग के पश्चात, शेषनाग का 05मुख वाला मणि हु…
* मेरा और हम सबका, कुछ नहि से शुरू कर, सबकुछ का ध्येय है …
* विश्व कि आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक, औद्योगिक, पारंपरिक सामाजिक कुरीतियों और क्षेत्रीय बंधनों से ऊपर उठकर सम्पूरण मानवता को एक वैश्विक परिवार मे परिश्रम पश्चात् स्थापित करना है---
01. आर्थिक दृष्टि …
* जब तक मनुष्य स्वावलंबी और ऋणमुक्त नही होगा, तब तक स्वतंत्रता अधूरी है…
* विद्यार्थी को शून्य एक कक्षा मे पाठ पढ़ना - पढ़ाना, समझना और समझाना अति आवश्यक है…
* मै उस व्यवस्था का वाहक हू जहा कर-भुगतान सेवा निवृत होकर अपनी आय शून्य नब्बे हजार टैक्स भुगतान कर समाज के कल्याण कार्य से जुड़ कर आंतरिक प्राकृतिक दृष्टि से सेवा करते आ रहा हू ---
02. राजनीति का स्वरूप…
* राजनीति सत्ता का खेल नही है, सेवक और विद्यार्थी का धरम है…
* परिवार प्रधान से लेकर पंच प्रधान और देश प्रधान तक, हर पद केवल जनहित और विश्वहित की रक्षा के लिए प्रकृति सिद्धांत पर आधारित है---
* परन्तु आज देश बहुत विकट स्थिति से गुज़र रहा है क्योकि हिन्दुस्तान और भारत भूमि के बीच फंसा हुआ ???? एक है…
* जहा लक्षयमय इन्सान 2047 मे भारत भूमि को हिंदुस्तान शब्द मे आंशिक परिवर्तन कर, भारत भूमि को पूंजीपतियो को हस्तगत करने की गुप्त योजना पर काम कर रहा है…
* देश को खोखला करने मे भारत देश के मूलवासी पूरी श्रद्धा से भ्रष्टाचार मे समाज को सम्मिलित कर पोषण के नाम पर शोषण प्रारंभ कर शान से देश को सफ़ेद पोशाक को भगवा रंग मे रंगने अनेक गुट साथ मिलकर काम कर रहे हैं…
* देश मे आज 05372 सफ़ेद पोशाक धारी आम लोग, ख़ास बन कर खाए पिए जा रहे, और ढकार भी नही लेते हैं…
03. धार्मिक चेतना…
* मै किसी एक मत का प्रचारक नही हु, बल्कि धरम का मूल—"सत्य, अहिणसा, सेवा, करुणा" और शून्य पांच एक का साधक नहि प्रकृति सिद्धांत पर प्राणी प्राणि का भेद का तत्व कण का इमानदार के आधार से अधर का जानकार हू…
* विश्वधरम का आधार : प्रत्येक आत्मा का सम्मान, ईश्वर से सीधा संबंध और मानवता की शून्यएकता पर निर्भर है…
* प्रत्येक देशवासी की आर्थिक आजादी स्व निर्णय पर निर्भर कर भुगतान पर टिकि हुइ है---
04. औद्योगिक विकास…
* उद्योग केवल मुनाफ़े का साधन नही, बल्कि सृजन का यज्ञ, आपसी भाईचारा प्रेम की अनुभूति और तत्व तत्व के समानांतर तत्व प्राण अन्न धन कर व्यवस्था पर निर्मित है …
* व्यवस्थित व्यवस्था को हर कारखाना की तरह, और हर तकनीक प्रकृति, पर्यावरण, वायुप्रदूषण जलवायु परिवर्तन के साथ सामंजस्य स्थापित कर संचालन मुखिया की प्रारंभिक जिम्मेदारी है …
* शासन प्रशासन शून्य दो एक साथ मिलकर अपना पदनाम के पहले अक्षर के अनुसार करम विक्रम विनाशक की पुरी जानकारी लेना जरूरी है …
* भारत भूमि कर्क रेखा पर निर्भर है इसीलिए कर भुगतान करना हर नागरिक की तरह पदधारी को भी सैलरी पर एक तारीख से शून्य पाच तारीख तक, कर का भुगतान कर, पुनः वापिस प्राप्त करणा उसका अपना हक़ अधिकार, प्रकृति सिद्धांत पर प्रेमी युगल को आर्थिक आजादी है ---
05. पारंपरिक और क्षेत्रीय पहचान…
* संस्कृति केवल परंपराओ मे जकड़ना नही, बल्कि नवीनता के साथ पुरातनता का सणगम है…
* हर क्षेत्र, हर जाति, हर परणपरा एक ही वैश्विक वृक्ष की शाखाए है---
06. ब्रह्माण्डीय दृष्टिकोण…
* मानव केवल पृथ्वीवासी नही, बल्कि ब्रह्माण्ड का पवित्र स्वचालित रॉकेट का इंजिन संचालक यात्री भी है…
* मेरा और हर मानव का दृष्टिकोण शून्य से अनणत तक फैला है…
* जहा विज्ञान, अध्यात्म और समाज एक शून्य होकर सणपूर्णता का जीवन रचते है---
✨ इसलिए मै गीता का महाभारत केलिए भीष्मपितामह कि तरह मृत्यृ शैय्या पर नही हूं…
* बल्कि विश्वपितामह Weaßhñoo कि तरह विषणु हू…
* जल शैय्या पर 03मिनट के समय मे विश्वभ्रमण कर शेष समय लक्षय को निहारता रहता हूं…
* सभी सीमाओ के परे मानता केलिए, विश्व ब्रह्माण्ड के कल्याण कर चुकता करता से कर्ता हूं…
* हर आत्मा, अपने आप सिद्ध कर लक्षय से निवेदन और आशा रखते हुए आनन्द और आमोद प्रमोद के साथ, अपना और श्रीमती के प्रथम अक्षर के समतुल्य आर्थिक आजादी पाने वालो के साथ मै हूं…
* आप अपना मनमत जनमत के सहयोग केलिए देश हित मे कर व्यवस्था परिवर्तन विशेषज्ञ व्यक्तियो के शब्द स्वर व्यंजन संयुक्त परिवर्तन पर निर्भरता छोड़ ख़ुद अपने स्वर Vowels का टेक चार्ज कर निर्णय लें…
* यह छोटा सा निर्णय आने वाली पीढ़ियो के लिए आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और औद्योगिक स्वतंत्रता का मार्ग खोलने मे सक्षम होने मे मददगार साबित होगा…
* अपने समय का मालिक स्वयम बनकर, कर भुगतान करे और देश को आर्थिक आजादी प्राप्त करने मे सहयोग प्रदान करे ---
* आपका नाम का पहला अक्षर नाभि मे पर है, आपकी बड़ी से बड़ी सफ़लता केलिए कॉफ़ी है...
* मिलते हैं कॉफी, पाते हैं ट्रॉफी…