तिनका, सूई की नोक और ब्रह्माण्ड का संयोग…
तिनका, सूई की नोक और ब्रह्माण्ड का संयोग…
* (005 तत्व + 005 ज्ञान + 005 कर्म = योग 00000015) , शक्ति (05_001)⁰⁶ रेखा मन_दिल - बीj|बिज़ पहलवान अंधा है…
* “जब तन–मन–धन–बुद्धि, समय–संस्कार, प्रसाद–स्वास्थ्य, रोजगार–सुरक्षा और देशहित…
* जब स्वयं के दिल|मन में एक साथ ख्वाइश जनम ले, तो तिनका सूई की नोक से विशालकाय वृक्ष है…
* सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड साकार रुप रूल जुट सुतली बिज़ जड़ पैदावार कम नहीं शेर मन है…”
* यह लेख उसी सत्य की व्याख्या है—जहाँ इच्छा (ख्वाइश) इमानदारी का जन्म देती है…
* प्रयास अमर स्वयं आदेश है, और योग का समय माध्यम से ब्रह्माण्ड सहयोगी है…
* मन और दिल के बीच की दूरी अनन्त है, पर जब “I” (आइ), दोनों प्लस-बिंदु पर मिलते हैं, तब वही दूरी सेतु, आंतरिक गहराई, अनन्त शुन्य उच्चाई छू छु कर भुगतान का लेन देन पूरण सहायक वरदान है…
* ① 005 तत्व (तत्त्व): जीवन की आधार- रचना :•: …
* पृथ्वी — स्थिरता, अनुशासन, संसाधन- संरक्षण, अन्न पोषण पैशन अनुसरण उद्योगपति शरीरधारी मुखवंशावली इन्सान प्रोसुमर पद्धति सेवा गतिशील है…
* जल — संवेदना, प्रवाह, अनुकूलन वातावरण निर्माण स्वपरिवर्तन हितकारी, भुगतान अज्ञान श्रेष्ठ अध्यात्म औषधि प्रसाद वितरण शुन्य शुन्य एक दाना इन्सान इमानदार विद्यार्थी रॉयल्टी रिटर्न कर खाना पीना जिवन संस्कार प्रसाद है…
* अग्नि — संकल्प, साहस, परिवर्तन निडर बलवान निर्भीक सेवक प्रकाश भाई भाइ बहनो जय विजय अभियान प्रारंभ दिनांक नही हक़ीक़त शिक्षित अज्ञान सेवा चेतना भारतवासी सभी एक बिन्दु नाभि विश्व कल्याण मे समाया वंशज है…
* वायु — विचार, संचार, गति पवन समय सार रूप अनेक इतिहास विचार नौ जानाऊ धारण विचारधारा पवन अभागा गायन कर्ता ख़ुद कृषक मॉडल GMP निर्भर है…
* आकाश — विस्तार, मौन, संभावना शुन्य स्थिर ऊर्जा जागृत है पर हर अलग अलग शुन्य शुन्य शून्य एक जोड़ शुन्य दो आंखवाला पहलवान अंधा आंख वाला निर्धन भिखारी काना राजा है…
* तत्त्व संतुलित इच्छा बोझ नही, बीज कारण बेरोजगारि निदान कर बेटा बेटी विद्यार्थी है…
* ② 005 ज्ञान (बोध): दृष्टि का शुद्धिकरण
आत्म-बोध — मै कौन हूँ हु, क्यो हूँ हु ००७|007अA प्रश्न तत्त्व संतुलित सिर्फ़ अनिवार्य हक़ीक़त उर्जा केन्द्र 001सिध्दांत बिज़ Bbj…
* समय-बोध — सही क्षण, सही गति निश्चित नहि अपरिवर्तनशील गति पल 02133_09योगगुरु ज्ञान नही अपवित्र कब्रस्थान यादगार 0108 सिद्धी श्री अंक है …
* मानव प्राणि रोगि नही सिर्फ़ भ्रम ब्रह्म अधूरा आत्म ज्ञान विज्ञान बिन्दु जागृत इनसान साकार 01कर बिज ख़ुद कृषक मॉडल देह - ०२देश सेवा कर्म-बोध—परिणाम स्पष्ट निदान है…
* सम्बन्ध - बोध — स्वयं, समाज, प्रकृति का संतुलन लक्ष्य-बोध — ख्वाइश, उत्तरदायित्व
इच्छा पवित्र रखना दान है...
* लोभ लक्ष्य जिवन 090 बरस वरदान गार्डन फल फूल पत्ती वनस्पति फ़सल अन्न है…
* ③ 005 कर्म (आचरण): साकार विधि…
* शुद्ध कर्म-सर्वहितय ईमानदारी के साथ किया गया प्रयास अमर प्रेम बिज़ संग्रहण मुख है …
* निरन्तर कर्म — रोज़ का छोटा, सही कदम…
* सहयोग कर्म — अकेले नहीं, साथ मिलकर
* सेवा कर्म — स्वयं से आगे समाज के लिए…
* संयमी कर्म-साधन में सादगी, साध्य में दृढ़ता…
* कर्म पुल है जिस पर चलकर इच्छा परिणाम फल है…
* ④ योग 00000015: एकीकरण का सूत्र :•:
* 005 तत्त्व + 005 ज्ञान + 005 कर्म = (015)⁰⁶…
* 015 = पूर्ण अभ्यास, जहाँ मन प्रगतिशील गतिशील प्राण जिवन इनकम है, दिल है, दोहाथ सहयोग अंगुली प्राण कर है…
* योग—विभाजन का अंत, एकत्व की शुरुआत .
* ⑤ ख्वाइश नियम (Rule of Honest Desire)…
* इमानदार ख्वाइश अकेला नहीं छोड़ती…
* वह प्रयास का स्वयं हुकुम प्रयास करती है, और ब्रह्माण्ड को साझेदार स्वयम है…
* मन–दिल की दूरी सिमटी है, तो अनन्त भी सहज होता परिणाम फ़ल है…
* ???? निष्कर्ष :•:
* तिनका छोटा बड़ा 01एक समान केन्द्र पर—हमारी दृष्टि छोटी है…
* जब “I” के दोनों बिंदु मिलते हैं, तो सूई की नोक भी अनन्त का द्वार है…
* बस साथ मिलकर प्रयास हि —ब्रह्माण्ड पहले से तैयार है…