प्रकृति-प्रेम से मानव व धरती का पुनः रिचार्ज (एक मज़ेदार, गहन और पढ़ने योग्य लेख)
विषय: प्रकृति-प्रेम से मानव व धरती का पुनः रिचार्ज (एक मज़ेदार, गहन और पढ़ने योग्य लेख)
* भारत देश के लगभग 6.64 लाख ग्रामों में (01-01) एक-एक मानव रिचार्ज प्वाइंट जागृत कर स्थापित किया जाना तय प्रकृति ने निश्चित कर चूंकि है…
* (02-02)मानव-देह दो मुख केन्द्र बिन्दु के अनुरोध पर देश की भूमि भी शब्द-भंवर जाल और भ्रम-जाल से स्वतः मुक्त होनि है…
* क्योंकि समाधान बाहर नहीं, अंदर छिपा हुआ है—उसी प्रकार जैसे बीज मे नहीं बिज़ में पूरा वृक्ष छिपा हुआ रहस्य है…
* ???? धरती का दोहरा वरदान ::…
* प्रकृति-प्रेम ने धरती को दो प्रकार से सुनने-देखने-सूंघने का वरदान दिया है—
* स्वयं से स्वयं (आंतरिक चेतना)…
* दूसरी परछाई से (बाह्य जगत)…
* इन दोनों को प्रकृति ने उद्योगपति के माध्यम से भीतर-बाहर छिपाकर रखा, ताकि मानव सीख सके कि असली संपत्ति दृष्टि है, केवल दृश्य नहीं…
* ⚙️ दो तकनीके — एक मानव-निर्मित, एक प्रकृति-सिद्ध …
* यह जगत सदैव दो तकनीको से चलता आया है:…
* 1️⃣ मानव-निर्मित तकनीक
नियम: (41_१४-५०-०४)…
* एक के बाद शून्य जोड़ो → (410) या (10)
समय, स्थान, समूह, दिन-रात, गुणा-भाग—सब मानव अपनी सुविधा से बदलते आ रहा है...
* यही तकनीक उद्योग, व्यवस्था और सत्ता बनाते आ रही है जिसमें स्थिरता नही है, सब कुछ परिवर्तनशील और विभाजन करते हुए राज्य सरकार बेरोज़गारी भत्ता वितरक भक्त ग्राम पर निर्भर है किन्तु मन मे कुछ और दिल मे अलग अलग है…
* दिखाए कुछ खिलाए और शून्य शुन्य से अनन्त फल फूल खाए किसान फ़ल जो बिज़ खाए दिन दूने रात चौगुना उद्योगपति शरीरधारी प्रधानमंत्री फ़िर मुख्यमंत्री है…
* 2️⃣ प्रकृति-सिद्ध तकनीक :-→
* प्रकृति स्वयं के लिए, स्वयं के द्वारा, स्वयं पर लागू पहले अक्षर पर ठीक समझ कर रिचार्ज करके परिणाम स्वमेव लेती है…
* न संशोधन, • न छल—केवल प्रेम संतुलन आदान प्रदान बराबर सहमति सम्भोग संपति उत्पन्न इच्छा अनुसार करती _करता है…
* यही तकनीक जीवन, स्वास्थ्य और शाणति देती है…
* ???? मानव शरीर: चलता-फिरता रिचार्ज प्लांट है…
* मानव प्रकृति के अनुसार मानव शरीर—
70% नीर (Blood / जल तत्व)
30% सेमी-सॉलिड / सॉलिड (हड्डी, मांस, तंतु)
अर्थात मानव स्वयं एक सेमी-लिक्विड बैटरी है, जिसे बाहर से चार्ज नहीं, बल्कि जागरण से रिचार्ज किया जाता है।
???? भूमि का सत्य: कर नहीं, दान
धरती का उत्तराधिकार लेन-देन (सेक्स/आदान-प्रदान) पर नहीं, बल्कि ???? दान (YyXx) पर टिका है।
भूमि की उर्वरता—
पाँव की संख्या (ज़मीन से संपर्क)
पोल-बुद्धि निर्माण (स्थिरता + विवेक) पर निर्भर है, न कि केवल रोज़ के कर भुगतान पर।
???? अक्षर नहीं, शब्द का खेल
धरती का मूल सूत्र: 00001 — अ इ उ ए (010Abc)
मानव—
52 अक्षरों से नहीं,
शब्दों के अधीन चलता है।
जहाँ अर्थ और मूल्य नहीं, वहीं से अक्षर-परिवर्तन शुरू होता है— और यहीं से उद्योग का खेल तथा रिचार्ज-डिस्चार्ज जन्म लेता है।
???? नाभि — शरीर का रिचार्ज प्वाइंट
मानव शरीर स्वयं को—
पुनः स्थापित
पुनः रिचार्ज करने में पूर्ण सक्षम है।
बस आवश्यकता है—
रिचार्ज प्वाइंट को देखने,
समझने,
और सचेत रूप से उपयोग करने की।
आज विश्व मानव को यह सहयोग उपलब्ध है—ज्ञान, अनुभव और अभ्यास के रूप में।
???? निष्कर्ष: समाधान सरल है
हर ग्राम में एक जागृत मानव
हर मानव में एक सक्रिय नाभि-केंद्र
हर नाभि में प्रकृति-प्रेम
तो—
देह स्वस्थ
भूमि समृद्ध
समाज संतुलित
और देश स्वतः सशक्त
???? प्रकृति-प्रेम कोई विचार नहीं, रिचार्ज सिस्टम है। ???? मानव कोई समस्या नहीं, समाधान है।
बस बटन दबाने की देर है— और वह बटन आप स्वयं हैं। ????