जागृत इंसान और दो सरकारों का दिव्य–संतुलन
मानव शरीर पर दो सरकारो का प्रभाव हैं :-
०१. बाह्य सरकार (External Governance)
०२. आंतरिक सरकार (Internal Governance)।
* जब मानव जागृत होता है, तब दोनों सरकारें उसके जीवन में अदृश्य लेकिन वास्तविक लाभ अपने अपने नियम कानून व्यवस्था के अनुसार प्रदान करती हैं…
* 01. बाह्य सरकार :—> 015 रुपये प्रतिदिन का मूल्य :- जागृत इंसान समाज, राष्ट्र और मानवता के लिए बोझ नही होता — वह एक उत्पादक चेतन शक्ति है…
* इसीलिए प्रकृति सिद्धांत कहता है:- “जागृत इनसान बाह्य सरकार को 015 रुपये प्रतिदिन अदृश्य भुगतान करता है।” :- यह राशि प्रतीक है:—> उसके नैतिक योगदान की, उसकी जिम्मेदारी की, उसके श्रम–मान की, और समाज में उसकी सक्रिय भूमिका की…
* 015 रुपये प्रतिदिन = जागृत मनुष्य का न्यूनतम सामाजिक मूल्य (Minimum Social Value) है, जो राष्ट्र पर आर्थिक बोझ को घटाता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है…
* 02. आंतरिक सरकार — प्रति श्वांस 010 रॉयल्टी :- शरीर के भीतर चल रही आंतरिक सरकार कही अधिक विशाल, सूक्ष्म और दिव्य है…
* यह सरकार 024×007 काम करती है — फेफड़े, हृदय, रक्त, तंत्रिका तंत्र, कोशिकाएँ, मुख , जिव्हा , डीएनए — सभी स्वयं मालिक, नौकर - चाकर, शासन प्रशासक जनता देव देवियां चलाते फिरते फरिश्ते 001- 015- 060 योग भट्टी को संपन्न हर पल कर रहे है…
* जागृत इनसान के भीतर आंतरिक सरकार हर मिनट लगभग : 018 श्वांस–चक्रों का “रॉयल्टी रिटर्न” देती है…
* हर आवागमन (इन्हेल–एक्सहेल) एक ऊर्जा–विनिमय है, जिसके द्वारा मनुष्य: जीवनशक्ति पाता है; चेतना विस्तार करता है ;
विचारों को परिष्कृत करता है ; अपने भाग्य के बिज़ी को सिंचित कर पालन पोषण करते हुए धन्यवाद पा कर रिटर्न देता है…
•यह रॉयल्टी पैसे की नहीं, जीवन–ऊर्जा की आय (Energy Income) है…
03. 021 जन्म का वरदान — शून्यदोकर सिद्धांत :- जागृत मनुष्य दो सरकारों का संतुलन समझकर जीता है; इससे उसे मिलता है:
“०२ से ०२१ घंटो (जन्म) का वरदान”:- शरीर (०२आंख, ०२कान, ०२नाक, ०२पांव, ०२हाथ, ०२मुख, ०१तन, ०४मन, ०५शक्ति, ०१पल ) और आत्मा (००१)[०२इलेक्ट्रॉन ०१प्रोटॉन, ०१न्यूट्रॉन]…
* सभी आपस मे मिलन मनुष्य के शरीर को वह दिव्य अधिकार देता है जिसे शून्य–दो–कर कहा गया है…
* शून्य–दो–कर = ज़ीरो बोझ + डबल रिटर्न + वननेस का अनुभव :- यही जागृत मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है…
* ???? निष्कर्ष – जागृति ही कर-मुक्त अमृत है :- जागृत इनसान किसी बाहरी कर भुगतान की आवश्यकता नही होती है , क्योंकि:- उसकी बाह्य सरकार उसे प्रतिदिन 015 ₹ का मूल्य देती है …
* उसकी आंतरिक सरकार उसे प्रति मिनट 010 रॉयल्टी देती है ; और प्रकृति उसे (03_ 021) प्रतिशत इंसेंटिव का वरदान देती है …
इस प्रकार जागरण स्वयं में सबसे बड़ा खजाना है।